मरीजों का आरोप: जानकीरमन, विक्टोरिया, स्मार्ट सिटी, आशीष और समर्थ श्री हॉस्पिटल ने दबाए मेडिकल दस्तावेज; आगे के इलाज में आ रही परेशानी
जबलपुर
जबलपुर जिले के निजी और सरकारी अस्पतालों में मरीजों के अधिकारों के हनन का एक बड़ा मामला सामने आया है। डिस्चार्ज होने के बाद भी कई अस्पतालों द्वारा मरीजों को उनके इलाज की मूल फाइल (ओरिजिनल मेडिकल रिकॉर्ड) नहीं सौंपी जा रही है। इस गंभीर मनमानी से परेशान होकर आधा दर्जन पीड़ितों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) जबलपुर को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ितों का कहना है कि बार-बार चक्कर काटने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन फाइल देने से इनकार कर रहे हैं, जिससे उनका आगे का इलाज प्रभावित हो रहा है।
केस स्टडी: इन अस्पतालों पर लगे हैं गंभीर आरोप
केस 1: जानकीरमन और विक्टोरिया हॉस्पिटल की लापरवाही
शाहपुरा भीटोनी निवासी मनोज चौधरी ने बताया कि उनके बेटे मदन चौधरी का इलाज पहले जानकीरमन अस्पताल और उसके बाद शासकीय विक्टोरिया हॉस्पिटल में हुआ था। आरोप है कि दोनों ही अस्पतालों ने मरीज को इलाज की संपूर्ण मूल फाइल प्रदान नहीं की।
केस 2: तीन अस्पतालों के चक्कर में उलझा मरीज
ग्राम रमखिरिया और दौलतपुर निवासी बसंती मल्लाह, सकून बाई और राजू मल्लाह ने संयुक्त शिकायत में बताया कि उन्हें इलाज के लिए पहले स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। वहां से उन्हें आशीष हॉस्पिटल और फिर उखरी रोड स्थित समर्थ श्री हॉस्पिटल रेफर किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद किसी भी अस्पताल ने उन्हें इलाज के मूल दस्तावेज नहीं सौंपे।
केस 3: फाइल के लिए भटक रहा युवक
शाहपुरा निवासी अर्पित सोनी ने भी CMHO को दी गई शिकायत में जानकीरमन अस्पताल पर इलाज की मूल फाइल रोकने का सीधा आरोप लगाया है।
सरकारी योजनाओं और आगे के इलाज में आ रही दिक्कत
पीड़ितों ने CMHO को सौंपे पत्र में बताया कि मूल फाइल (Medical File) न होने के कारण वे किसी अन्य डॉक्टर से परामर्श नहीं ले पा रहे हैं। इसके साथ ही, दस्तावेज न होने से सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और बीमा (Health Insurance) का लाभ लेने में भी भारी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों से कार्रवाई की मांग
पीड़ितों (मदन चौधरी, बसंती मल्लाह, सकून बाई, राजू मल्लाह और अर्पित सोनी) ने अपने पहचान पत्रों के साथ स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से मांग की है कि दोषी अस्पतालों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें उनके इलाज के मूल दस्तावेज वापस दिलाए जाएं।
ब्यूरो रिपोर्ट, जबलपुर




