सरकारी सेवा यदि निष्ठा से की जाए तो प्रशासनिक व्यवस्था सुधरती है, लेकिन यदि उसी सेवा के साथ संवेदना और समाज हित का जज़्बा जुड़ जाए, तो वह जन-जन के लिए प्रेरणा बन जाती है।
दमोह/बटियागढ़ से रैकवार की रिपोर्ट
कुछ ऐसा ही अनूठा उदाहरण पेश कर रहे हैं दमोह जिले की बटियागढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम सादपुर में पदस्थ पटवारी सत्येंद्र जैन। अपने पदीय दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के साथ-साथ वे पिछले कई वर्षों से निर्धन बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हुए हैं।
आनंद मदद घर’ से शिक्षा की नई अलख
वर्ष 2019 से निरंतर जारी इस सेवा यात्रा को पटवारी सत्येंद्र जैन ने आनंद मदद घर’ का नाम दिया है, जो उनके पूज्य पिता श्री आनंद जैन की प्रेरणा पर आधारित है। इस पहल के माध्यम से वे क्षेत्र के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में जाकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निःशुल्क शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराते हैं।
बच्चों को नियमित स्कूल आने और लगन से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते हुए वे स्वयं अपने हाथों से:
उच्च गुणवत्ता की कॉपियां व पेन
ज्यामितीय कंपास बॉक्स
पीने के पानी की बोतले
एवं अन्य आवश्यक पठन-पाठन सामग्री
का वितरण करते हैं। उनके इस प्रयास से न केवल शासकीय शालाओं में बच्चों की उपस्थिति बढ़ रही है, बल्कि उनमें शिक्षा के प्रति एक नया उत्साह भी देखा जा रहा है।
बिना किसी स्वार्थ और सरकारी अनुदान के खुद के व्यय पर पहल
इस पूरी मुहिम की सबसे खास और अनुकरणीय बात यह है कि सत्येंद्र जैन इस परमार्थ कार्य के लिए कोई सरकारी मदद या सार्वजनिक चंदा नहीं लेते। वे अपनी गाढ़ी कमाई और व्यक्तिगत व्यय से ही यह सेवा कार्य संचालित कर रहे हैं।
“हमारे पिताजी का हमेशा से यही संस्कार और मार्गदर्शन रहा है कि सामर्थ्य के अनुसार जितना संभव हो दूसरों का भला करते रहो। बच्चों के चेहरों पर मिलने वाली मुस्कान ही मेरी असली कमाई है।”
सत्येंद्र जैन, पटवारी (सादपुर)
इस निस्वार्थ अभियान में क्षेत्र के कुछ संवेदनशील समाजसेवी भी कदम से कदम मिलाकर सहयोग दे रहे हैं।
सादपुर प्राथमिक शाला में बांटीं बोतलें, चमकीं मासूमों की आंखें
इसी कड़ी में हाल ही में शासकीय प्राथमिक शाला सादपुर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शाला के शिक्षकों की अनुमति से पटवारी सत्येंद्र जैन एवं समाजसेवी अभिषेक असाटी ने कक्षाओं में जाकर बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाली प्लास्टिक वॉटर बॉटल का वितरण किया।
उपहार स्वरूप नई बोतलें पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। मासूमों ने उत्साहपूर्वक प्रतिदिन स्कूल आने और मन लगाकर पढ़ाई करने का संकल्प लिया।
शिक्षकों व ग्रामीणों ने मुक्त कंठ से की सराहना
विद्यालय परिवार एवं स्थानीय ग्रामीणों ने पटवारी सत्येंद्र जैन की इस अभिनव सोच और समाजसेवी अभिषेक असाटी के सहयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। शिक्षकों का कहना है कि पटवारी जी का यह प्रयास केवल सामग्री बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अंचल के बच्चों में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।