MP सरकार के ₹60,113 करोड़ का हिसाब ‘लापता’, 81 हजार उपयोगिता प्रमाण-पत्रों का अता-पता नहीं

 पंचायती राज और सामाजिक न्याय विभाग बने लापरवाही के केंद्र, 5 बड़े विभागों में ₹53 हजार करोड़ से ज्यादा का ‘अनदेखा’ खर्च

 वित्तीय पारदर्शिता की उड़ीं धज्जियां; CAG ने कहा—’आंतरिक नियंत्रण तंत्र हुआ पूरी तरह ध्वस्त, तय हो अधिकारियों की जवाबदेही’

भोपाल (राजधानी ब्यूरो)

मध्य प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन में बड़ी संवेदनहीनता और घोर लापरवाही की पोल खुद देश की सबसे बड़ी लेखापरीक्षक संस्था—**भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG)** ने खोल दी है। CAG की वर्ष 2024-25 की ताजा रिपोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार के कामकाज पर ऐसा ‘वित्तीय महा-विस्फोट’ हुआ है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग विभागों ने ₹60,113 करोड़ का ऐसा खर्च कर डाला है, जिसका आज तक कोई आधिकारिक हिसाब-किताब ही दर्ज नहीं है। विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम पर बांटी गई इस विशालकाय राशि के 81,000 से अधिक उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilization Certificates – UC) धूल फांक रहे हैं या गायब हैं।

बदनामी के शिखर पर ये 5 बड़े विभाग (कहां गया टैक्सपेयर्स का पैसा?)

CAG के आंकड़ों के अनुसार, जनता की गाढ़ी कमाई के रुपयों का हिसाब दबाकर बैठने में राज्य के पांच प्रमुख विभाग सबसे आगे हैं:

 1. पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास: ₹20,453 करोड़

 2. सामाजिक न्याय व दिव्यांगजन सशक्तिकरण: ₹20,045 करोड़

 3. ग्रामीण विकास विभाग: ₹8,051 करोड़

 4. नगरीय विकास एवं आवास विभाग: ₹3,053 करोड़

 5. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग: ₹2,181 करोड़

गौर करने वाली बात: सिर्फ इन 5 विभागों का ही लंबित आंकड़ा ₹53,783 करोड़ को पार कर जाता है, जो सीधे तौर पर ग्राउंड लेवल पर हो रही वित्तीय धांधली और मॉनिटरिंग की कमी को उजागर करता है।

 CAG का सीधा चाबुक: ‘यह वित्तीय नियमों का गंभीर अपराध’

CAG ने अपनी रिपोर्ट में बिना किसी लाग-लपेट के लिखा है कि नियमानुसार समय पर यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट (UC) जमा न करना केवल प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि वित्तीय नियमों का सीधा और गंभीर उल्लंघन है।

जब तक उपयोगिता प्रमाण-पत्र जमा नहीं होते, तब तक यह सिद्ध कर पाना नामुमकिन है कि अरबों-खरबों रुपये की यह रकम वाकई सही योजना, सही ठेकेदार या सही गरीब लाभार्थी तक पहुंची भी है या फिर कागजों में ही स्वाहा हो गई। CAG ने सरकार की ‘इंटरनल ऑडिट और मॉनिटरिंग सिस्टम’ को पूरी तरह से असफल करार दिया है।

 CAG की 3 कड़ी सिफारिशें: ‘रुकें अगली किस्तें, नापें अफसर’

CAG ने राज्य सरकार को कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से ये कदम उठाने की सिफारिश की है:

 1. अधिकारियों पर कसे शिकंजा: वर्षों से फाइलें दबाकर बैठे संबंधित विभागाध्यक्षों और वित्तीय अधिकारियों पर सीधी विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही तय हो।

 2. नो UC, नो फंड्स (No UC, No Funds): जब तक पुराने खर्च किए गए बजट का वैध प्रमाण-पत्र जमा न हो, तब तक संबंधित विभागों और एजेंसियों की अगली वित्तीय किस्त पर तुरंत रोक लगाई जाए।

 3. डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम: बजट आवंटन से लेकर अंतिम उपयोग (Last Mile Delivery) तक की कठोर और पारदर्शी ट्रैकिंग व्यवस्था लागू हो।

इस खुलासे के बाद भोपाल से लेकर दिल्ली तक प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है। एक तरफ जहां वित्त विभाग में पेंडिंग रिपोर्टों को खंगालने का दौर शुरू हो गया है, वहीं विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने और ‘घोटाले’ के आरोप लगाने का सबसे बड़ा बारूद मिल गया है। सवाल यही है कि जनता के ₹60,000 करोड़ से ज्यादा के इस बेहिसाब खजाने का असली सच कब सामने आएगा?

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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