स्वास्थ्य विभाग में 56.98 लाख का बड़ा गड़बड़झाला; CMHO समेत 4 अफसरों पर गिरी गाज, 15 दिन में रिकवरी का अल्टीमेटम!

 मध्यप्रदेश सरकार एक तरफ प्रदेश में ‘पारदर्शी प्रशासन’ और जीरो टॉलरेंस की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ जबलपुर का स्वास्थ्य विभाग घोटालों का नया केंद्र बनता जा रहा है।

जबलपुर

यहाँ भ्रष्टाचार की परतें प्याज के छिलकों की तरह एक के बाद एक उखड़ रही हैं।

ताजा सनसनीखेज मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के बजट में हुए भारी गोलमाल का है, जहां बिना काम किए ही सरकारी खजाने से 56 लाख 98 हजार रुपये साफ कर दिए गए। इस महालापरवाही और वित्तीय अनियमितता को लेकर राज्य स्तर से बड़ी कार्रवाई की गई है। जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नवीन कोठारी समेत चार बड़े अधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। जवाब संतोषजनक न होने पर सीधे जेब से रिकवरी की गाज गिरेगी।

 क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ ‘खेल’?

शहरी क्षेत्र के गरीबों को बेहतर इलाज देने के लिए जबलपुर जिले में संजीवनी क्लीनिकों को अपग्रेड किया जाना था। इसके तहत संस्थाओं को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस मानक (NQAS) के अनुसार विकसित कर उनका सर्टिफिकेशन कराया जाना था।

 बजट का आवंटन: प्रति क्लीनिक 1 लाख रुपये के मान से कुल 58 संजीवनी क्लीनिकों के लिए 58 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई थी।

 कागजों पर खर्च:इस आवंटित राशि में से 56.98 लाख रुपये बाकायदा खर्च भी दिखा दिए गए।

 हकीकत शून्य: जब भोपाल (राज्य स्तर) से इस योजना की समीक्षा की गई, तो अधिकारी दंग रह गए। वित्तीय वर्ष 2025-2026 में पूरी राशि ठिकाने लगाने के बाद भी जबलपुर जिले की **एक भी शहरी स्वास्थ्य संस्था का प्रमाणीकरण (Certification) नहीं कराया गया और न ही कोई क्लीनिक मानकों पर तैयार मिली।

 इन 4 रसूखदार अधिकारियों पर लटकी तलवार

अपर मिशन संचालक (NHM) द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (क्रमांक: एन.एच.एम./शहरी स्वास्थ्य/2026/ई-1241172/06/1023) के तहत जिन अधिकारियों को इस गंभीर लापरवाही और वित्तीय हेराफेरी का दोषी माना गया है, वे हैं:

 1. डाॅ. नवीन कोठारी (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी – CMHO)

 2. संदीप नामदेव (सहायक शहरी कार्यक्रम प्रबंधक)

 3. शिखा गर्ग (जिला क्वालिटी मॉनिटर)

 4. रेखा साहू (जिला लेखा प्रबंधक)

 भोपाल से साफ निर्देश दिए गए हैं कि 15 दिनों के भीतर NQAS प्रमाणीकरण की स्थिति स्पष्ट करें, अन्यथा खर्च की गई पूरी राशि की वसूली (रिकवरी) इन अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से की जाएगी।

 ‘मैंने तो अभी ज्वाइन किया है…’ – मौजूदा CMHO का पल्ला झाड़ने का प्रयास

इस पूरे मामले पर जब जबलपुर के वर्तमान CMHO डॉ. नवीन कोठारी से बात की गई, तो उन्होंने इस गड़बड़ी से खुद को दूर रखने की कोशिश की।

डॉ. कोठारी का कहना है:

जबलपुर जिले में वर्तमान में केवल 42 संजीवनी क्लीनिक ही कार्यशील हैं, जबकि नोटिस में संख्या 58 बताई गई है। मैंने इसी साल 5 अप्रैल 2026 को इस पद का प्रभार संभाला है, इसलिए यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं बल्कि पूर्व CMHO के समय का है। चूंकि नोटिस ‘पद’ के नाम पर जारी हुआ है, इसलिए इसमें मेरा नाम अंकित है। नोटिस पत्र की भाषा में भी कुछ कन्फ्यूजन है, जिसका जवाब तैयार किया जा रहा है।”

 जनता का पैसा पानी में, व्यवस्थाएं जस की तस

भले ही अधिकारी अब तकनीकी कमियों और ‘भाषा के कन्फ्यूजन’ की आड़ लेकर अपना पल्ला झाड़ने में जुटे हों, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब धरातल पर कोई काम हुआ ही नहीं, तो करीब 57 लाख रुपये की सरकारी राशि किसकी जेब में गई? स्वास्थ्य विभाग के इस नए कारनामे ने जिले के प्रशासनिक तंत्र और स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोलकर रख दी है। अब देखना यह है कि 15 दिनों की मियाद बीतने के बाद शासन इन दोषियों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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