महाघोटाला: ‘ब्लाइंड-बाबू’ चला रहे कार, जो चल नहीं सकता वो लगा रहा दौड़; MP में दिव्यांग कोटे के फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा!

मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों (Physically Handicapped) को मिलने वाले आरक्षण के नाम पर एक ऐसा घिनौना और हैरान कर देने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम की शुचिता पर कालिख पोत दी है।

भोपाल

‘ एक खोजी रिपोर्ट ने इस पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार मंत्रियों के बंगलों से लेकर सरकारी स्कूलों तक फैले हुए हैं।

इस घोटाले की हकीकत इतनी शर्मनाक है कि जो कागजों पर ‘ब्लाइंड’ (पूर्णतः दृष्टिहीन) बनकर सरकारी नौकरी का मजा ले रहे हैं, वे असल जिंदगी में सड़कों पर शान से कार और मोटरसाइकिल दौड़ा रहे हैं। वहीं, जिन्होंने ‘अस्थि बाधित’ (लोकोमोटर डिसेबिलिटी) होने का फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी पाई और कागजों में चल भी नहीं सकते, वे असलियत में सरेआम दौड़ लगाते नजर आ रहे हैं।

 मंत्रियों के बंगलों से लेकर स्कूलों तक ‘फर्जी दिव्यांगों’ का जाल

इस महाखुलासे में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने सरकारी सिस्टम में इस कदर सेंध लगाई है कि मंत्री के स्टाफ से लेकर शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों तक में ऐसे ‘फर्जी दिव्यांगों’ को नौकरी पर बैठा दिया गया है। योग्य और असली दिव्यांग नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, और चंद रुपयों व रसूख के दम पर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने वाले लोग सरकारी खजाने से मोटी सैलरी उठा रहे हैं।

कैसे हुआ इस पूरे खेल का पर्दाफाश?

 ब्लाइंड-बाबू’ का ड्राइविंग स्टंट: कागजों में जो महाशय पूरी तरह से देख नहीं सकते (Blind Category), वे दिन के उजाले में व्यस्त सड़कों पर ट्रैफिक के बीच बिना किसी हिचकिचाहट के कार और बाइक चलाते कैमरे में कैद हुए हैं।

 कागजों में लाचार, हकीकत में ‘धावक’: कई ऐसे कर्मचारी भी रडार पर आए हैं, जिन्होंने खुद को चलने-फिरने में असमर्थ बताकर दिव्यांग कोटे का लाभ लिया, लेकिन वे असल जिंदगी में पूरी तरह तंदुरुस्त हैं और सामान्य लोगों की तरह दौड़-भाग कर रहे हैं।

 मेडिकल बोर्ड और दलालों का तगड़ा नेक्सस

यह घोटाला बिना प्रशासनिक मिलीभगत के मुमकिन नहीं था। सूत्रों के मुताबिक, जिला अस्पतालों के मेडिकल बोर्ड के कुछ भ्रष्ट डॉक्टरों और दलालों के गठजोड़ ने मिलकर यह पूरा खेल रचा है। चंद रुपयों की रिश्वत लेकर 40% से लेकर 60% तक की फर्जी दिव्यांगता के सर्टिफिकेट बांटे गए। इसके बाद इन सर्टिफिकेट्स का इस्तेमाल करके सरकारी परीक्षाओं (जैसे शिक्षक भर्ती, पटवारी भर्ती आदि) में कम कट-ऑफ का फायदा उठाकर नौकरियां हथिया ली गईं।

 उठ रहे हैं गंभीर सवाल, असली दिव्यांगों के हक पर डाका

इस खुलासे के बाद मध्यप्रदेश के युवाओं और असली दिव्यांग संगठनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि उन हजारों दिव्यांग भाई-बहनों के हक पर डाका है जो अपनी शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।

अब जनता और युवा सरकार से सीधे सवाल कर रहे हैं:

 1. मंत्रियों और बड़े विभागों के नाक के नीचे इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कैसे फलता-फूलता रहा?

 2. क्या सरकार इन सभी संदेहास्पद नियुक्तियों की उच्च स्तरीय जांच (SIT) कराएगी?

 3. फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉक्टरों और नौकरी पाने वाले जालसाजों को जेल भेजा जाएगा?

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब शिवराज सरकार/मोहन यादव प्रशासन पर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने और सभी दिव्यांग नियुक्तियों की री-मेडिकल जांच कराने का भारी दबाव बन गया है 

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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