आरटीआई में जानकारी छिपाने पर राज्य सूचना आयोग सख्त, मझौली नगर परिषद को एक माह में ‘दैनिक वेतन भोगियों’ की जानकारी देने का आदेश

आयोग ने लोक सूचना अधिकारी के गैर-जिम्मेदाराना तर्कों को किया खारिज

 निजी डेटा की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए नि:शुल्क जानकारी देने का निर्देश

 3 साल पुराने मामले में अपीलार्थी की अनुपस्थिति के बावजूद गुण-दोष के आधार पर हुआ फैसला

मझौली (जबलपुर)

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI)-2005 के तहत जानकारी देने में आनाकानी करने वाले स्थानीय निकायों और अधिकारियों पर राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है।

नगर परिषद मझौली में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की भर्ती और उनके दस्तावेजों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त श्री ओंकार नाथ ने लोक सूचना अधिकारी (PIO) को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने आदेश जारी करते हुए मझौली नगर परिषद को एक माह के भीतर अपीलार्थी को वांछित दस्तावेज निःशुल्क प्रमाणित प्रति के रूप में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

क्या था पूरा मामला? मझौली के वार्ड क्रमांक 12 निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुंदर लाल बर्मन ने 15 फरवरी 2023 को नगर परिषद मझौली में एक आवेदन दायर किया था। इस आवेदन के माध्यम से उन्होंने नगर परिषद में नियुक्त दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की भर्ती की नियमावली, उनके द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की सत्यापित छायाप्रतियां (सॉफ्टकॉपी में) और भर्ती के लिए निर्धारित आयु सीमा की स्पष्ट जानकारी मांगी थी।

अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना तर्क खारिज

मामला जब द्वितीय अपील के तहत राज्य सूचना आयोग पहुँचा, तो सुनवाई के दौरान मझौली नगर परिषद के सहायक लोक सूचना अधिकारी श्री लक्ष्मी नारायण सिंह राजपूत (सहायक राजस्व निरीक्षक) उपस्थित हुए। उन्होंने आयोग के सामने तर्क दिया कि आवेदन 3 साल पुराना होने के कारण कार्यालय में इसके दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि निकाय में दैनिक वेतन भोगी के रूप में कोई भर्ती नहीं की गई है, बल्कि जरूरत पड़ने पर कलेक्टर दर पर ‘साप्ताहिक श्रमिक’ रखे जाते हैं।

राज्य सूचना आयुक्त ने अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैए और अजीबोगरीब तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट माना कि दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को रखने के संबंध में शासन की नियमावली की प्रति अपीलार्थी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी, जिससे विभाग पीछे भाग रहा है।

थर्ड पार्टी’ की निजता का रखा जाएगा ध्यान, आधार-बैंक डिटेल छिपेंगे

राज्य सूचना आयोग ने आदेश में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू को रेखांकित किया। आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को निर्देशित किया है कि चाही गई जानकारी में यदि किसी कर्मचारी या तृतीय पक्ष (Third Party) के संवेदनशील व्यक्तिगत दस्तावेज जैसे— आधार कार्ड, बैंक खाता नंबर या अन्य निजी जानकारियां शामिल हैं, तो उन्हें अधिनियम की धारा 10 (पृथक्कीकरण का सिद्धांत) के तहत छुपा दिया जाए या हटा दिया जाए। इसके बाद शेष बची हुई प्रमाणित कॉपियां एक महीने के अंदर अपीलार्थी को बिना किसी शुल्क के सौंपी जाएं।

दस्तावेज न होने पर देना होगा लिखित हलफनामा:

राज्य सूचना आयुक्त ने अपने फैसले में यह भी साफ किया है कि यदि वांछित जानकारी का कोई हिस्सा या अभिलेख कार्यालय में सचमुच उपलब्ध नहीं है, तो लोक सूचना अधिकारी को इसकी स्पष्ट और लिखित सूचना कारण सहित अपीलार्थी को देनी होगी। आदेश की प्रति संबंधित पक्षकारों को भेजकर प्रकरण को अंतिम रूप से निराकृत कर दिया गया है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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