शासकीय योजनाओं के अंतर्गत गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गठित स्व-सहायता समूहों में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है।
खितौला/जबलपुर
जबलपुर जिले के खितौला थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक स्व-सहायता समूह की राशि में हेराफेरी करने के आरोप में पुलिस ने समूह की अध्यक्ष और एक स्थानीय व्यापारी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, स्व-सहायता समूह के खाते में आई सरकारी राशि को नियमानुसार समूह के कार्यों या सदस्यों के कल्याण में खर्च किया जाना था। लेकिन, समूह की अध्यक्ष ने पद का दुरुपयोग करते हुए इस राशि को नियमों के विरुद्ध एक निजी व्यापारी को हस्तांतरित कर दिया।
संगठन के अन्य सदस्यों और जागरूक ग्रामीणों द्वारा इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई थी। प्राथमिक जांच में वित्तीय अनियमितता और गबन की पुष्टि होने के बाद, प्रशासन के निर्देश पर खितौला थाने में मामला दर्ज कराया गया।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी अध्यक्ष और संबंधित व्यापारी के विरुद्ध जालसाजी और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। खितौला थाना प्रभारी का कहना है कि:
“समूह की राशि के निजी लेन-देन के दस्तावेजी सबूत मिले हैं। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है और बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है।”
यह मामला मध्य प्रदेश सरकार के उन प्रयासों के बीच आया है जहां मुख्यमंत्री कार्यालय और JansamparkMP लगातार पारदर्शिता की बात कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जन कल्याणकारी योजनाओं के धन का दुरुपयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य स्व-सहायता समूहों में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से ही सरकारी योजनाओं में होने वाली बंदरबांट पर लगाम लगाई जा सकती है।




