आरटीआई कानून की धज्जियां! बीपीएल कार्ड धारक से ग्राम पंचायत रौसरा ने मांगा ₹2,562 का भारी-भरकम शुल्क, क्या जानबूझकर छुपाई जा रही है रोजगार की हकीकत?

सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 का मूल मकसद गरीब और आम जनता को ताकत देना है, लेकिन मध्य प्रदेश के मझौली से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है जो इस कानून की भावना पर ही सवाल खड़े करता है।

मझौली (मध्य प्रदेश)

ग्राम पंचायत रौसरा ने रोजगार की जानकारी मांगने वाले एक बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) कार्ड धारक आवेदक को ₹2,562.50 का तगड़ा बिल थमा दिया है। आरटीआई नियमों के मुताबिक बीपीएल परिवारों के लिए जानकारी पूरी तरह ‘निःशुल्क’ (फ्री) होती है, ऐसे में पंचायत का यह फरमान सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन नजर आ रहा है।

बीपीएल कार्ड होने पर भी ₹62.50 प्रति पेज का ‘अवैध’ बिल!

मामला तब गरमाया जब वार्ड नंबर 10 के वार्डन श्री शिवम साहू ने बीते 22 जून 2026 को ग्राम पंचायत रौसरा में रोजगार और निर्माण कार्यों का सच सामने लाने के लिए एक आरटीआई लगाई थी। उन्होंने विकास कार्यों के नक्शे, प्रशासनिक-तकनीकी स्वीकृतियां, अनुबंध (contracts) और इस्टीमेट की कॉपियां मांगी थीं।

पंचायत ने जानकारी छुपाने या आवेदक को डराने के उद्देश्य से कुल 41 पन्नों के लिए प्रति पृष्ठ ₹62.50 की दर तय कर दी और कुल ₹2,562.50 जमा करने का नोटिस (प्ररूप-दो) थमा दिया। पंचायत ने साफ कहा है कि यह राशि बैंक खाता संख्या 2274655097 में जमा होने के बाद ही दस्तावेज मिलेंगे।

कानून क्या कहता है? आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 7(5) के तहत गरीबी रेखा के नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले किसी भी नागरिक से जानकारी के बदले कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता। इसके बावजूद पंचायत द्वारा इतना बड़ा बिल थमाना प्रशासनिक मनमानी को दर्शाता है।

 22 जुलाई का अल्टीमेटम: नियम ताक पर, वसूली पर जोर

ग्राम पंचायत सचिव द्वारा जारी इस नोटिस में गरीब आवेदक को 22 जुलाई 2026 तक पैसे जमा करने की अंतिम चेतावनी दी गई है। पंचायत ने यह शर्त भी जोड़ दी है कि यदि दस्तावेज डाक से चाहिए, तो रजिस्टर्ड डाक का खर्च और लिफाफा भी आवेदक को खुद देना होगा। नियमों को ताक पर रखकर दिया गया यह अल्टीमेटम अब क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया है।

धारा 6(3) का खेल: जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश?

दस्तावेजों के मुताबिक, पंचायत ने प्ररूप-तीन जारी करते हुए आरटीआई कानून की धारा 6(3) के तहत आवेदन का एक हिस्सा संबंधित मुख्य विभाग को ट्रांसफर (अंतरित) कर दिया है। पंचायत का तर्क है कि कुछ जानकारियां उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर की हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि बीपीएल आवेदक को भारी-भरकम बिल थमाना और फिर आवेदन को यहां-वहार ट्रांसफर करना, कहीं न कहीं रोजगार के आंकड़ों में हुई गड़बड़ी को दबाने की कोशिश तो नहीं है?

जन सूचना अधिकारी और सचिव ने 15 जुलाई 2026 को इस विवादित नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या वरिष्ठ अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर आरटीआई कानून का मखौल उड़ाने वाली इस ग्राम पंचायत पर कार्रवाई करते हैं, या एक गरीब आवेदक को अपने हक की जानकारी के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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