कागजों पर ‘भूतिया’ वन चौकीदारों की फौज? RTI के 16 तीखे सवालों ने उड़ाए अफसरों के होश

मध्य प्रदेश के जबलपुर वनमंडल अंतर्गत मझौली वन परिक्षेत्र इन दिनों एक बेहद संवेदनशील और बड़े प्रशासनिक घालमेल के केंद्र में आ गया है।

मझौली/ जबलपुर

मामला वन विभाग के मैदानी अमले (फील्ड स्टाफ) द्वारा की गई ‘वन चौकीदारों’ और ‘वन चौकी सहायकों’ की नियुक्तियों और उनके वित्तीय भुगतान से जुड़ा है। परिक्षेत्र कार्यालय से लेकर बीट स्तर के अधिकारियों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब क्षेत्र के सजग नागरिक शिवम साहू द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 के तहत 16 कड़े बिंदुओं पर आधारित एक विस्तृत आवेदन सीधे लोक सूचना अधिकारी के टेबल पर दाग दिया गया।

इस आरटीआई आवेदन ने मझौली वन विभाग के भीतर लंबे समय से चल रही ‘बैकडोर एंट्री’ और नियुक्तियों के नाम पर सरकारी बजट को ठिकाने लगाने के खेल की परतों को उखाड़ना शुरू कर दिया है।

लाखों के मानदेय की बंदरबांट: धरातल पर सन्नाटा, फाइलों में तैनाती!

विश्वस्त सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, मझौली वन परिक्षेत्र की विभिन्न बीटों में नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर चौकीदारों की एक लंबी फौज खड़ी कर दी गई है। गंभीर आरोप यह हैं कि इन नियुक्तियों के लिए:

 न तो कोई शासकीय पद स्वीकृत था,

 न ही किसी तय चयन प्रक्रिय का पालन किया गया, और न ही कोई वैध विज्ञापन या सूचना जारी की गई।

क्षेत्र में यह चर्चा भी आम है कि कई अति-संवेदनशील बीटों में धरातल पर वास्तव में कोई चौकीदार तैनात ही नहीं है। आरोप है कि अफसरों और बीट गार्डों ने मिलीभगत कर केवल कागजों पर अपने चहेतों के नाम दर्ज किए हैं और हर महीने उनके नाम पर शासकीय मानदेय (बजट) का आहरण कर आपस में बंदरबांट की जा रही है।

RTI का वो चक्रव्यूह, जिसमें फंस गया वन अमला

आवेदक शिवम साहू ने कानून की धाराओं का बेहद सटीक इस्तेमाल करते हुए विभाग के सामने ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब देना अब जिम्मेदारों के लिए गले की हड्डी बन गया है। आवेदन के जरिए मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रमाणित कॉपियां मांगी गई हैं:

 भर्ती का असली ‘आका’ कौन?: प्रत्येक बीट में कार्यरत चौकीदार को काम पर रखने की लिखित अनुशंसा किस बीट गार्ड, वनरक्षक या डिप्टी रेंजर ने की थी? और इसे अंतिम प्रशासनिक हरी झंडी किस अधिकारी ने दी?

 दस्तावेजों का ‘एक्स-रे’: क्या रिकॉर्ड में तैनात इन चौकीदारों के वैध आवेदन पत्र, पुलिस वेरिफिकेशन (चरित्र सत्यापन प्रमाणपत्र), निवास और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज मौजूद हैं? या इन्हें सिर्फ मौखिक आदेश पर मलाई खिलाई जा रही है?

 बजट का ‘ब्लैक होल‘: वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में इन कथित चौकीदारों को किस मद (बजट हेड) से और किस भुगतान आदेश के तहत लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए? साथ ही इनकी रोजाना की उपस्थिति दर्शाने वाले ड्यूटी रजिस्टर की असलियत क्या है?

30 दिनों का काउंटडाउन शुरू: टालमटोल की तो देनी होगी ‘मुफ्त’ जानकारी

अधिनियम की धारा 7(1) का सख्त हवाला देते हुए आवेदक ने स्पष्ट कर दिया है कि महकमे को 30 दिनों की वैधानिक समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरी और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध करानी होगी। यदि तय समय सीमा के भीतर अधिकारी लीपापोती करने, फाइलें छुपाने या टालमटोल करने की कोशिश करते हैं, तो धारा 7(6) के तहत विभाग को यह सारी जानकारी निःशुल्क देनी होगी, जो सीधे तौर पर शासकीय कार्य में घोर लापरवाही और सूचना छुपाने का गंभीर मामला माना जाएगा।

कलेजा थामे बैठे हैं रसूखदार; गाज गिरना तय!

मझौली क्षेत्र के जानकारों और कानूनविदों का मानना है कि यदि यह आरटीआई सही मायनों में अपने मुकाम तक पहुँचती है, तो वन विभाग के भीतर चल रहे एक बड़े संगठित रैकेट का भंडाफोड़ हो सकता है। यदि लोक सूचना अधिकारी नियमानुसार पारदर्शिता के साथ दस्तावेज मुहैया कराते हैं, तो कई रसूखदार अधिकारियों, उपवन क्षेत्रपालों और बीट गार्डों पर विभागीय गाज गिरना तय माना जा रहा है।

अब पूरे जबलपुर वनमंडल की नजरें मझौली पर टिकी हैं कि क्या स्थानीय वन परिक्षेत्र कार्यालय कानून का सम्मान करते हुए पारदर्शिता की राह चुनेगा, या फिर इस संभावित ‘चौकीदार घोटाले’ को दबाने के लिए प्रशासनिक दांव-पेंच का सहारा लेगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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