मदिरा दुकानों पर मनमानी वसूली पर कलेक्टर का कड़ा रुख: हर दुकान पर अनिवार्य होगी रेट लिस्ट और QR कोड, ओवररेटिंग पर नपेंगे आबकारी अफसर
* अहातों पर हुई कार्रवाई और पेनल्टी वसूली का मांगा हिसाब, अफसरों की लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई
* सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का खानापूर्ति नहीं, आवेदक की संतुष्टि के साथ होगा गुणवत्तापूर्ण निराकरण
मझौली दर्पण ब्यूरो / जबलपुर
जिले भर में संचालित शराब दुकानों पर मनमाने दामों पर मदिरा विक्रय और अवैध पैकारी की शिकायतों को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने आबकारी विभाग के कामकाज की गहन समीक्षा करते हुए साफ निर्देश दिए हैं कि जिले की प्रत्येक कंपोजिट व देशी-विदेशी मदिरा दुकान पर रेट लिस्ट (मूल्य सूची) और क्यूआर कोड (QR Code) अनिवार्य रूप से चस्पा किए जाएं, ताकि उपभोक्ता निर्धारित दर पर ही खरीद कर सकें और किसी भी प्रकार की ओवररेटिंग पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
मैदान में दिखना चाहिए कार्रवाई का असर
कलेक्टर कार्यालय में आयोजित आबकारी विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अवैध शराब के कारोबार और निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने के मामलों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को दो टूक लहजे में चेतावनी दी कि ओवररेटिंग और अवैध बिक्री पर की जाने वाली कार्रवाई केवल फाइलों और कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका ठोस असर मैदानी स्तर पर दिखना चाहिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी वृत्त अथवा क्षेत्र में लापरवाही या मिलीभगत पाई गई, तो संबंधित आबकारी अधिकारी के खिलाफ सीधी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अपर कलेक्टर रविशंकर राय, अपर कलेक्टर शैलेंद्र सिंह एवं सहायक आबकारी आयुक्त संजीव कुमार दुबे सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
अवैध अहातों पर डंडा, पेनल्टी का लिया हिसाब
समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने शराब दुकानों के आसपास अनधिकृत रूप से संचालित होने वाले अहातों पर की गई कार्रवाई की स्थिति जानी। उन्होंने नियम विरुद्ध संचालन करने वालों पर इस वित्तीय वर्ष में अधिरोपित की गई पेनल्टी और अब तक राजकोष में जमा कराई गई राशि का वृत्तवार ब्यौरा तलब किया। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई कि कहीं भी अवैध रूप से शराब पिलाने या अहाता संचालित करने की छूट न दी जाए।
सीएम हेल्पलाइन में खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं
कलेक्टर ने आबकारी विभाग से जुड़ी सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों की परिक्षेत्रवार बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का निराकरण केवल औपचारिकता या खानापूर्ति के रूप में न किया जाए। हर शिकायत का गुणवत्तापूर्ण समाधान हो और आवेदक की वास्तविक संतुष्टि दर्ज होना अनिवार्य है। बिना ठोस समाधान के शिकायतों को बंद करने की प्रवृत्ति पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।