मझौली के साप्ताहिक हाट बाजार की अरबों की शासकीय भूमि के आवंटन पर गहराया रहस्य।

आरटीआई का मखौल या रसूखदारों को बचाने का खेल? हाट बाजार की सरकारी जमीन का रिकॉर्ड गायब, कलेक्टर ऑफिस ने झाड़ा पल्ला, राज्य सूचना आयोग ने बंद की फाइल!

कलेक्टर कार्यालय ने आवेदन किया निरस्त, कहा— ‘नगर परिषद जाओ।’

नगर परिषद का अजीबोगरीब दावा— ‘पुरानी व्यवस्था से लग रहा बाजार, हमारे पास रिकॉर्ड ही नहीं।’

मझौली/जबलपुर:

मझौली नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण ‘साप्ताहिक हाट बाजार’ की शासकीय भूमि को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज सच सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियों से यह साफ हो गया है कि करोड़ों-अरबों रुपये मूल्य की इस सरकारी जमीन का न तो कलेक्टर कार्यालय के पास कोई स्पष्ट आवंटन रिकॉर्ड है और न ही नगर परिषद मझौली के पास!

इस पूरे मामले में प्रशासनिक टालमटोल का यह आलम है कि जिम्मेदार अधिकारी जानकारी देने के बजाय गेंद को एक-दूसरे के पाले में फेंक रहे हैं।

कलेक्टर कार्यालय की ‘दो टूक’: आवेदन ही कर दिया निरस्त

ताजा घटनाक्रम में, मझौली निवासी सजग नागरिक और पत्रकार सुंदर लाल बर्मन ने २२ मई २०२६ को कलेक्टर कार्यालय जबलपुर में एक आरटीआई (RTI) आवेदन दायर कर मझौली हाट बाजार की शासकीय भूमि का खसरा नंबर, रकबा, स्वामित्व संबंधी राजस्व रिकॉर्ड (B-1/P-II) और आवंटन आदेश (Allotment Order) की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।

हैरान करने वाली बात यह है कि कलेक्टर कार्यालय (लोक सूचना शाखा) ने महज कुछ ही दिनों के भीतर १ जून २०२६ को पत्र क्रमांक/१५५/ जारी कर इस आवेदन को सीधे निरस्त कर दिया। कलेक्टर कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने आवेदक को लिखित में कहा:

“उक्त जानकारी लोक सूचना अधिकारी नगर परिषद् मझौली से संपर्क कर प्राप्त कर सकते हैं। अतः आवेदन इसी स्तर पर निरस्त किया जाता है।”

नियमों के मुताबिक, यदि जानकारी किसी अन्य विभाग से संबंधित हो, तो आवेदन को धारा 6(3) के तहत ट्रांसफर किया जाना चाहिए, लेकिन यहाँ आवेदन को सीधे निरस्त कर पल्ला झाड़ लिया गया।

पुरानी फाइल का सच: नगर परिषद के पास ‘रिकॉर्ड ही नहीं’

कलेक्टर कार्यालय जिस नगर परिषद मझौली के भरोसे आवेदक को भेज रहा है, उसका असली चेहरा मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग (भोपाल) के एक हालिया आदेश से उजागर होता है।

आवेदक सुंदर लाल बर्मन द्वारा वर्ष २०२३ में नगर परिषद मझौली से इसी हाट बाजार की भूमि का आवंटन रिकॉर्ड मांगा गया था। मामला जब द्वितीय अपील में राज्य सूचना आयोग पहुँचा, तो ८ अप्रैल २०२६ को भोपाल में हुई सुनवाई (प्रकरण क्र. ए-5426/2023) में मझौली नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) सुश्री नीतू सिंह गोण्ड उपस्थित हुईं।

वहाँ नगर परिषद ने जो लिखित लिखित पक्ष प्रस्तुत किया, वह चौंकाने वाला है। नगर परिषद ने स्वीकार किया:

“साप्ताहिक हाट बाजार पुरानी व्यवस्था के तहत ही लगता है। इस प्रकार नगर परिषद में बाजार के लिए शासकीय भूमि आवंटन से संबंधित दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं।”

राज्य सूचना आयुक्त श्री ओंकार नाथ ने इस दलील के बाद कि “रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और इसकी सूचना आवेदक को दी जा चुकी है”, प्रकरण को यह कहते हुए समाप्त कर दिया कि अब इसमें कोई आदेश अपेक्षित नहीं है।

मझौली दर्पण के बड़े सवाल: आखिर छुपाया क्या जा रहा है?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद ‘मझौली दर्पण’ प्रशासन और व्यवस्था से सीधे सवाल पूछता है:

क्या हाट बाजार की भूमि पर अतिक्रमण की तैयारी है? अगर नगर परिषद के पास आवंटन का कोई रिकॉर्ड नहीं है, तो इतने वर्षों से इस शासकीय भूमि का रख-रखाव और वहां से होने वाली टैक्स/बाजार बैठकी की वसूली किस हैसियत से की जा रही है?

राजस्व विभाग मौन क्यों? अगर कलेक्टर कार्यालय को नहीं पता कि यह भूमि नगर परिषद को कब और किस आदेश के तहत आवंटित हुई, तो क्या राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि आज भी ‘चरनोई’, ‘घास’ या ‘आबादी’ मद में दर्ज है? इसका खुलासा करने से क्यों बचा जा रहा है?

रिकॉर्ड का गायब होना लापरवाही या साजिश? एक तरफ क्षेत्र में भू-माफिया सक्रिय हैं, दूसरी तरफ सार्वजनिक उपयोग की इतनी बड़ी शासकीय भूमि का रिकॉर्ड गायब होना कई तरह के संदेह पैदा करता है।

ग्रामीणों और व्यापारियों में संशय

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हाट बाजार मझौली की धड़कन है। यदि प्रशासन के पास इसका कोई पुख्ता मालिकाना हक या आवंटन रिकॉर्ड नहीं है, तो भविष्य में इस बेशकीमती जमीन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? कलेक्टर कार्यालय द्वारा आवेदन को सीधे निरस्त कर देना यह दर्शाता है कि जमीनी हकीकत को सामने लाने में प्रशासनिक अमले की कोई रुचि नहीं है।

अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद क्या जबलपुर कलेक्टर इस मामले को संज्ञान में लेकर मझौली हाट बाजार के राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त करवाएंगे, या फिर यह अरबों की सरकारी जमीन बिना रिकॉर्ड के ही भगवान भरोसे चलती रहेगी?

ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़

जमीनी हकीकत, निष्पक्ष आवाज।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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