कनकधारा वेयरहाउस सील; 23 स्टैक्स की जांच में खुली पोल, दर्जनों बोरियों से निकले कंकड़-पत्थर
1 साल पहले ब्लैकलिस्ट हुए वेयरहाउस में दोबारा कैसे रखा गया सरकारी अनाज? निगरानी तंत्र पर उठे सवाल
माखननगर / नरसिंहपुर
मध्य प्रदेश में सरकारी उपार्जन और भंडारण व्यवस्था में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक खौफनाक और चौंकाने वाला उदाहरण नरसिंहपुर जिले से सामने आया है। माखननगर स्थित कनकधारा वेयरहाउस में सरकारी मूंग के भंडारण के नाम पर करीब ₹28.14 करोड़ के भारी घोटाले का खुलासा हुआ है। किसानों के पसीने की कमाई और शासन के राजस्व को चूना लगाते हुए मूंग की बोरियों में अनाज की जगह मिट्टी और कंकड़-पत्थर भर दिए गए।
मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। जिला विपणन अधिकारी की शिकायत पर वेयरहाउस संचालक और तत्कालीन जिला प्रबंधक सहित तीन अधिकारियों/जिम्मेदारों पर माखननगर थाने में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कलेक्टर को वेयरहाउस में अमानक भंडारण और मिलावट की गोपनीय शिकायतें मिलीं। निर्देशों के पालन में 22 जुलाई को प्रशासनिक और विभागीय संयुक्त टीम ने कनकधारा वेयरहाउस पर औचक छापा मारा।
निरीक्षण के दौरान जब 23 स्टैक्स की सघन जांच की गई, तो जांच दल के होश उड़ गए:
मिट्टी की बोरियां: दर्जनों बोरियों में मूंग की जगह शुद्ध रूप से मिट्टी और कंकड़ भरे हुए थे।
अमानक मिलावट: कई बोरियों में तय सीमा से कई गुना अधिक बाहरी कचरा और मिट्टी मिलाकर वजन बढ़ाया गया था।
सील की कार्रवाई: प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर मौके पर ही वेयरहाउस को सील कर दिया गया और वैज्ञानिक परीक्षण हेतु सैंपल लैब भेज दिए गए।
जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) से जुड़े अधिकारियों और संचालक के खिलाफ धारा-420, 409 व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
1. तारेश पुरोहित – वेयरहाउस संचालक (FIR दर्ज होते ही निजी अस्पताल में भर्ती)
2. श्याम होसले – तत्कालीन शाखा प्रबंधक
3. वासुदेव डवडे– तत्कालीन जिला प्रबंधक
यक्ष प्रश्न: ब्लैकलिस्टेड वेयरहाउस को पुनः शह किसने दी?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू विभागीय सांठगांठ की ओर इशारा करता है। सूत्रों के मुताबिक, कनकधारा वेयरहाउस में करीब एक साल पहले भी भारी अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद इसे आधिकारिक तौर पर ब्लैकलिस्ट (Blacklist) कर दिया गया था।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि:
* किस अधिकारी की सिफारिश या प्रशासनिक दबाव में एक काली सूची में दर्ज वेयरहाउस को पुनः करोड़ों रुपये के सरकारी भंडारण का ठेका दे दिया गया?
* क्या उपार्जन और भंडारण के समय भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने वाले अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी थीं?
प्रशासनिक वक्तव्य “किसानों के हित और सरकारी अनाज के उपार्जन में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले में सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा रही है और जिले के अन्य सभी वेयरहाउसों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।”
देवेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम, माखननगर
सरकारी खजाने को ₹28 करोड़ का नुकसान पहुंचाना केवल तीन लोगों का काम नहीं हो सकता। यह सीधे तौर पर निचले कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक फैले एक संगठित नेटवर्क का नतीजा है। देखना यह होगा कि क्या जांच की आंच उन आकाओं तक पहुंचेगी जिनके संरक्षण में यह ब्लैकलिस्टेड वेयरहाउस फिर से भ्रष्टाचार का अड्डा बना, या हमेशा की तरह मामले को कुछ नामों तक सीमित कर दबा दिया जाएगा




