मझौली में ‘सेवा सेतु’ का ढोंग, 48 घंटे से सूखे नल: प्यासी जनता का फूटा आक्रोश

अंदर शिविर में ‘सुशासन’ के दावों की औपचारिकता, बाहर 15 वार्डों में बूंद-बूंद को तरसते लोग; न कोई मुनादी, न टैंकरों का प्रबंध

मझौली (जबलपुर)

कागजी अभियानों और धरातल की हकीकत में कितना बड़ा फासला हो सकता है, इसका सटीक उदाहरण इन दिनों मझौली नगर परिषद में देखने को मिल रहा है। एक तरफ कार्यालय परिसर में शासन के ‘सेवा सेतु’ अभियान के बड़े-बड़े बैनर लगाकर जनता को सुशासन का भरोसा दिलाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ समूचा नगर पिछले दो दिनों से जल संकट से त्राहि-त्राहि कर रहा है। विगत 48 घंटों से नलों से पानी गायब है, लेकिन कुंभकर्णी नींद में सोए जिम्मेदार अधिकारियों ने जनता को एक सूचना तक देना मुनासिब नहीं समझा।

संवेदनहीनता की हद: बिना मुनादी रोकी सप्लाई, अंधेरे में रखा नगर

जल प्रदाय प्रणाली ठप होने की स्थिति में तय नियम कहते हैं कि क्षेत्र में लाउडस्पीकर से मुनादी कराई जाए या सार्वजनिक सूचना चस्पा की जाए, जिससे आम नागरिक वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें। मझौली नगर परिषद ने इस बुनियादी प्रशासनिक शिष्टाचार को भी ताक पर रख दिया।

बिना किसी पूर्व चेतावनी के सप्लाई ठप होने से घरों में हड़कंप मच गया। सुबह के वक्त नलों से हवा निकलती देख नागरिकों को झटका लगा। इसका सीधा असर दैनिक दिनचर्या पर पड़ा—न खाना समय पर बन सका और न ही स्कूली बच्चे व दफ्तर जाने वाले लोग समय से निकल सके।

हैंडपंपों पर ‘जल-युद्ध’, चांदी काट रहे निजी टैंकर माफिया

नगर के 15 वार्डों में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोग काम-धंधा छोड़कर बाल्टी-डिब्बे लिए पानी की तलाश में भटक रहे हैं:

 * हैंडपंपों और कुओं पर पहरा: गिने-चुने चालू सार्वजनिक हैंडपंपों पर सुबह 5 बजे से ही बर्तनों की लंबी कतारें लग रही हैं। पानी भरने को लेकर कई मोहल्लों में विवाद की नौबत आ रही है।

 * निजी टैंकरों की मनमानी: परिषद द्वारा प्रभावित इलाकों में निशुल्क टैंकर भेजने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। इसका सीधा फायदा निजी टैंकर संचालक उठा रहे हैं, जो मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं।

 * गरीब बस्तियों में गहरा संकट: संपन्न तबका पानी खरीदकर काम चला रहा है, लेकिन दैनिक मजदूरी करने वाले गरीब परिवारों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

 “कार्यालय के भीतर एसी कमरों में ‘सेवा सेतु’ के नाम पर फाइलों का अंबार लगाकर केवल खानापूर्ति की जा रही है। फोटो खिंचवाने वाले अफसरों को यह नहीं दिखता कि जिस नगर के लिए वे बैठे हैं, वह दो दिन से प्यासा है। अगर फॉल्ट था, तो कम से कम एक दिन पहले मुनादी तो करानी थी!”

 — संतोष राय, स्थानीय निवासी

फोटो खिंचवाने तक सीमित ‘सेवा सेतु’, बुनियादी फर्ज भूले अफसर

शासन ने ‘सेवा सेतु’ अभियान की शुरुआत इसलिए की थी ताकि आमजन की समस्याओं का उनके द्वार पर समाधान हो। मझौली में यह अभियान केवल प्रशासनिक तमाशा बनकर रह गया है। जिस निकाय पर नगर की बुनियादी जीवनरेखा यानी पेयजल व्यवस्था संभालने का जिम्मा है, वही महकमा 48 घंटे बीत जाने के बाद भी फॉल्ट सुधारने में नाकाम साबित हो रहा है।

अधिकारियों का यह लापरवाह रवैया सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि उन्हें जनता की बुनियादी तकलीफों से कोई सरोकार नहीं है।

सीधे सवाल, कब टूटेगी अफसरों की खामोशी?

 * यदि मुख्य पाइपलाइन या मोटर में तकनीकी खराबी आई थी, तो 48 घंटे तक बैकअप प्लान क्यों लागू नहीं हुआ?

 * नगर के प्रभावित वार्डों में परिषद के अपने टैंकरों से जलापूर्ति क्यों शुरू नहीं कराई गई?

 * जनता को अंधेरे में रखने वाले जलप्रदाय शाखा के प्रभारियों पर क्या सीएमओ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे?

यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो आक्रोशित जनता किसी भी वक्त नगर परिषद कार्यालय का घेराव कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

Latest News

Stay Connected

0FansLike
30FollowersFollow
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Most View