विकास या विनाश? सतपुड़ा पावर प्लांट की नई यूनिट के लिए ‘सफेद झूठ’ का सहारा

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में स्थित सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट एक बार फिर विवादों के घेरे में है।

बैतूल

12 हजार करोड़ की लागत से बनने वाली 660 मेगावाट की नई यूनिट को लेकर प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे हैं। दैनिक भास्कर की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन में खुलासा हुआ है कि पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) हासिल करने के लिए कागजों पर न केवल तथ्यों को छुपाया गया, बल्कि कई ‘सफेद झूठ’ भी बोले गए।

टाइगर कॉरिडोर और वन्यजीवों पर संकट

सबसे चौंकाने वाला खुलासा टाइगर कॉरिडोर को लेकर हुआ है। प्रबंधन ने रिपोर्ट में दावा किया कि टाइगर कॉरिडोर प्रोजेक्ट साइट से 10 किलोमीटर दूर है, जबकि हकीकत में यह दूरी महज 1 किलोमीटर है। वन विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि यहाँ 30 से अधिक अति संरक्षित वन्यजीव निवास करते हैं। यहाँ तक कि दुर्लभ ‘सतपुड़ा लेपर्ड गको’ (छिपकली की प्रजाति) भी इसी इलाके में पाई जाती है, जिसके अस्तित्व पर अब खतरा मंडरा रहा है।

तवा नदी और वेटलैंड को खत्म करने की तैयारी

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट के लिए तवा नदी के लगभग 6 एकड़ जलमग्न (Submerged) हिस्से को भरने की योजना है। यह वही वेटलैंड है जहाँ साइबेरिया जैसे दूर देशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। जहाँ आज पक्षियों का कलरव सुनाई देता है, वहाँ भविष्य में केवल राख और धुआं होने की आशंका जताई जा रही है।

पेड़ों की कटाई पर विरोधाभासी दावे

प्रबंधन ने शुरू में दावा किया था कि इस प्रोजेक्ट के लिए एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सैकड़ों पेड़ों पर कटाई के निशान पाए गए हैं और प्लांट के इंजीनियर ने खुद स्वीकार किया है कि 800 पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई है।

वैकल्पिक जमीन होने के बावजूद नई साइट क्यों?

वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्टों ने सवाल उठाया है कि जब प्लांट परिसर में ही पुरानी बंद हो चुकी यूनिटों की खाली जमीन उपलब्ध थी, तो नई और संवेदनशील जगह को क्यों चुना गया? जानकारों का मानना है कि निर्माण के नाम पर बड़े वित्तीय खेल के चलते जानबूझकर नई जगह का चयन किया गया है।

जांच के घेरे में 6 प्रमुख दावे:

| क्रम | प्रबंधन का दावा | जमीनी हकीकत

| 1 | टाइगर कॉरिडोर 10 किमी दूर है | कॉरिडोर केवल 1 किमी की दूरी पर है |

| 2 | एक भी पेड़ नहीं कटेगा | 800 पेड़ काटने की अनुमति प्रक्रिया में है |

| 3 | केवल मोर पाए जाते हैं | 30+ संरक्षित प्रजातियां और दुर्लभ गको मौजूद हैं |

| 4 | डैम को नुकसान नहीं होगा | 6 एकड़ जलमग्न जमीन को भरा जा रहा है |

| 5 | प्रवासी पक्षियों पर असर नहीं | साइबेरियाई पक्षियों का मुख्य पड़ाव खतरे में है |

| 6 | अन्य कोई विकल्प नहीं था | पुरानी यूनिटों की खाली जमीन उपलब्ध थी

 बिजली उत्पादन के नाम पर तवा नदी का दम घोटने और सतपुड़ा के जंगलों को उजाड़ने की इस कोशिश ने पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों में भारी रोष पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या विकास की यह कीमत चुकाना जायज है?

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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