पिता को पहुंचाया सरकारी लाभ, सरपंची गई हाथ से!

दर्शनी पंचायत के सरपंच सुमित राय बर्खास्त, ₹50 हजार के भुगतान ने खोली सत्ता के दुरुपयोग की पोल

मझौली/जबलपुर।

जनपद पंचायत मझौली की ग्राम पंचायत दर्शनी में सत्ता के दुरुपयोग और पारिवारिक लाभ पहुंचाने का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला पंचायत जबलपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी ने ग्राम पंचायत दर्शनी के सरपंच सुमित राय को उनके पद से तत्काल प्रभाव से पृथक (बर्खास्त) कर दिया है।

आरोप है कि सरपंच ने अपने पद और प्रभाव का उपयोग करते हुए पंचायत निधि से अपने ही पिता संतोष राय के खाते में ₹50,000 का भुगतान कराया। मामले की जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने के बाद जिला पंचायत प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया।

एक शिकायत और खुल गया पूरा खेल

मामले की शुरुआत ग्राम पंचायत दर्शनी निवासी मोहन झारिया की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पंचायत निधि का उपयोग नियमों को ताक पर रखकर सरपंच के परिजनों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है।

जिला पंचायत स्तर पर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए गए। जनपद पंचायत मझौली द्वारा गठित जांच दल ने पंचायत दर्पण पोर्टल, भुगतान अभिलेख, बिल वाउचर और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया। जांच में शिकायत को सही पाया गया।

तीन किस्तों में पिता के खाते में पहुंची राशि

जांच प्रतिवेदन के अनुसार पंचायत निधि से कुल ₹50,000 की राशि सरपंच के पिता संतोष राय के खाते में स्थानांतरित की गई थी।

 भुगतान का विवरण

₹15,000 — विधायक निधि अंतर्गत रंगमंच निर्माण कार्य

₹15,000 — खनिज मद से सामुदायिक भवन निर्माण कार्य

 ₹20,000 — विधायक निधि अंतर्गत रंगमंच निर्माण कार्य

तीनों भुगतान नवंबर 2023 में किए गए और सरकारी अभिलेखों में सफल भुगतान (Success Done) दर्ज पाया गया।

जांच के दौरान सरपंच सुमित राय, पंचायत सचिव भीषम सिंह और एक ईंट विक्रेता ने दावा किया कि पंचायत निर्माण कार्यों के लिए खरीदी गई ईंटों का भुगतान पहले संतोष राय ने अपनी निजी राशि से किया था।

उनका कहना था कि ग्राम गुरजी के ईंट व्यवसायी रामभैया चक्रवर्ती को 10 हजार ईंटों के एवज में ₹50,000 नकद दिए गए थे, इसलिए बाद में वही राशि पंचायत निधि से संतोष राय को वापस की गई।

ईंट विक्रेता ने भी इसी कथन का समर्थन किया, लेकिन जांच और न्यायिक परीक्षण में यह तर्क कानून की कसौटी पर टिक नहीं पाया।

न्यायालय की दो टूक: “रिश्तेदार को लाभ पहुंचाना कानूनन अपराध”

मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और प्रतिपरीक्षण का परीक्षण करने के बाद विहित प्राधिकारी ने स्पष्ट कहा कि पंचायत पदाधिकारी अपने पद का उपयोग किसी भी नातेदार को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए नहीं कर सकता।

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 40 के स्पष्टीकरण में यह प्रावधान स्पष्ट रूप से दर्ज है कि सरपंच या अन्य पदाधिकारी अपने माता-पिता, पत्नी, पुत्र अथवा अन्य नातेदारों को आर्थिक लाभ नहीं पहुंचा सकते और न ही उनके माध्यम से पंचायत कार्य करा सकते हैं।

न्यायालय ने माना कि सरपंच द्वारा अपने पिता के खाते में पंचायत निधि से भुगतान कराया जाना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है तथा यह पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

लोकहित में पद पर बने रहना माना गया अनुचित

अपने आदेश में विहित प्राधिकारी ने टिप्पणी की कि ऐसा पदाधिकारी जो अपने अधिकारों का उपयोग निजी एवं पारिवारिक हित साधने के लिए करता है, उसका पंचायत पद पर बने रहना लोकहित में उचित नहीं माना जा सकता।

इसी आधार पर धारा 40(क) एवं 40(ख) के तहत सुमित राय को तत्काल प्रभाव से सरपंच पद से पृथक कर दिया गया।

अब पंचायत में होगी नई व्यवस्था

आदेश की प्रतिलिपि पंचायत राज संचालनालय भोपाल, जिला निर्वाचन अधिकारी जबलपुर, एसडीएम सिहोरा तथा संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है।

जनपद पंचायत मझौली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि ग्राम पंचायत दर्शनी में वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्यवाहक सरपंच की नियुक्ति हेतु आवश्यक कार्रवाई तत्काल प्रारंभ की जाए।

बड़ा सवाल

यह कार्रवाई केवल एक सरपंच की बर्खास्तगी नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता का बड़ा संदेश है।

अब सवाल यह है कि क्या जिले की अन्य पंचायतों में भी ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होगी? या फिर कई और फाइलों में छिपे ऐसे मामले सामने आने बाकी हैं?

दर्शनी पंचायत का यह मामला निश्चित रूप से उन जनप्रतिनिधियों के लिए चेतावनी है जो सरकारी धन को निजी संपत्ति समझने की भूल करते हैं।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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