नगर परिषद मझौली में जल संकट गहराता जा रहा है। पिछले दो दिनों से पूरे नगर की जल सप्लाई ठप पड़ी है, जिससे भीषण गर्मी के इस मौसम में नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हो गए हैं।
मझौली (जबलपुर)
नगर परिषद की इस अव्यवस्था ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है और जनता में भारी रोष व्याप्त है।
स्थानीय नागरिकों का सबसे बड़ा सवाल नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर है। जनता का कहना है कि प्रशासन ‘जल कर’ (Water Tax) तो पूरे महीने का वसूलता है, लेकिन पाइपलाइनों से पानी महीने में बमुश्किल 15 दिन ही नसीब होता है।
दो दिनों से सूखा: पिछले 48 घंटों से नलों में पानी नहीं आया है, जिससे दैनिक कार्य पूरी तरह प्रभावित हैं।
अघोषित कटौती: जल सप्लाई बंद करने से पहले न तो कोई सूचना दी गई और न ही वैकल्पिक व्यवस्था (जैसे टैंकर) की गई।
आर्थिक बोझ: एक तरफ जनता महंगाई की मार झेल रही है, दूसरी तरफ नगर परिषद बिना सेवा दिए टैक्स वसूलने में मशगूल है।
नगर परिषद मझौली की सीएमओ और संबंधित इंजीनियरों की लापरवाही के कारण पानी जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है। बाजार प्लाट और अन्य वार्डों के लोगों का कहना है कि जब भी शिकायत की जाती है, तो तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
नागरिकों का आक्रोश:”जब टैक्स पूरे 30 दिन का लिया जाता है, तो पानी सिर्फ 15 दिन क्यों दिया जा रहा है? क्या नगर परिषद का काम सिर्फ वसूली करना है, सुविधा देना नहीं?”
1. अनियमित सप्लाई: आखिर क्यों बिना किसी ठोस कारण के बार-बार जल प्रदाय रोका जाता है?
2. मेंटेनेंस का अभाव: क्या पाइपलाइन और मोटरों के रखरखाव के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है?
3. जिम्मेदारी तय हो: इस भीषण गर्मी में जल संकट पैदा करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
मझौली की जनता ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियमित जल सप्लाई शुरू नहीं की गई और टैक्स के अनुपात में सुविधाएं नहीं सुधारी गईं, तो वे नगर परिषद कार्यालय का घेराव करने पर मजबूर होंगे।




