न 24×7 इमरजेंसी कंट्रोल रूम, न हेल्पलाइन नंबर जारी आपदा प्रबंधन सेल नदारद; त्वरित राहत कार्यबल का भी अता-पता नहीं
* बड़ा सवाल: क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागेगा प्रशासन?
मझौली/जबलपुर (विशेष संवाददाता)।
मझौली नगर परिषद की कार्यप्रणाली और जनसुरक्षा के प्रति उसकी संवेदनशीलता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कस्बा तेजी से फैल रहा है और आबादी बढ़ रही है, लेकिन आकस्मिक संकट या आपदा से निपटने के लिए नगर परिषद के पास रत्ती भर भी तैयारी नहीं है। नगर में आगजनी, भारी बारिश के चलते जलभराव, आंधी-तूफान में पेड़ों का गिरना, मकान ढहना या अन्य गंभीर दुर्घटनाओं की स्थिति में नागरिकों की सहायता के लिए न तो कोई आधिकारिक 24×7 हेल्पलाइन नंबर सक्रिय है और न ही जमीनी स्तर पर राहत पहुंचाने वाली कोई त्वरित कार्यबल टीम (Quick Response Team) मौजूद है।
रात के अंधेरे में बेबस नागरिक, कहां लगाएं गुहार?
आपदा कभी समय या पूर्व सूचना देकर नहीं आती, लेकिन परिषद प्रबंधन इस बुनियादी सच से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि आधी रात को किसी वार्ड में जलभराव या अन्य कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो लोग मदद के लिए किससे संपर्क करें? कार्यालय बंद होने के बाद परिषद से संपर्क साधने का कोई भी आधिकारिक माध्यम जनता के पास नहीं है। नियंत्रण कक्ष का न होना यह साबित करता है कि नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा को लेकर तंत्र कितना बेपरवाह है।
जमीनी स्तर पर बुनियादी खामियां:
* कंट्रोल रूम शून्य: किसी भी अप्रिय घटना की सूचना देने के लिए कोई केंद्रीकृत टोल-फ्री या लैंडलाइन हेल्पलाइन नंबर नहीं है।
* संसाधनों व प्रशिक्षित कर्मियों की कमी: आपदा के समय त्वरित बचाव, मलबा हटाने या जलनिकासी जैसी प्राथमिक जरूरतों के लिए कोई समर्पित दस्ता तैनात नहीं रहता।
* जिम्मेदारों की खामोशी: बार-बार उठती मांगों के बावजूद आपदा प्रबंधन ढांचा तैयार करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों ने इस प्रशासनिक शिथिलता पर कड़ा रोष जताया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन संभवतः किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि बिना किसी देरी के 24 घंटे संचालित हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक किया जाए और प्रशिक्षित कर्मियों से लैस एक त्वरित कार्यबल का गठन हो, ताकि संकट के समय लोगों को समय रहते मदद मिल सके।