पारदर्शिता के नाम पर खुला खेल: बिना वास्तविक सप्लाई धड़ाधड़ पास हुए बिल; L1 फिक्सिंग से बाजार भाव से कई गुना ऊंची दरों पर हुई खरीदी

नगरीय निकायों में ₹250 करोड़ का महाघोटाला: GeM पोर्टल में सेंध लगाकर चहेती फर्मों पर लुटाई जनता की गाढ़ी कमाई

 * समीक्षा बैठक में फूटा भांडा: ACS संजय दुबे और MPSEDC के MD संकेत भोंडबे के सामने खुला गड़बड़झाला; पूरे प्रशासनिक अमले में मची खलबली

भोपाल

मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में जीरो टॉलरेंस और पारदर्शिता के दावों का जनाजा निकल गया है। सरकारी खरीद में बिचौलियों और कमीशनखोरी पर लगाम कसने के लिए अनिवार्य किए गए केंद्र सरकार के ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ (GeM) पोर्टल को ही अफसरों और सप्लायर्स के सिंडिकेट ने भ्रष्टाचार का सबसे मुफीद जरिया बना डाला। सूबे के विभिन्न नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में करीब ₹250 करोड़ की सुनियोजित वित्तीय डकैती का खुलासा हुआ है।
यह सनसनीखेज पर्दाफाश उस वक्त हुआ जब अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे और राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम (MPSEDC) के प्रबंध संचालक संकेत भोंडबे ने प्रदेश भर के नगरीय निकायों की ई-खरीदी की उच्चस्तरीय समीक्षा की। डिजिटल डेटा, वाउचर और परचेज ऑर्डर्स के मिलान के दौरान स्क्रीन पर उभरे आंकड़ों ने आला अफसरों के होश उड़ा दिए।
ऐसे बुना गया भ्रष्टाचार का चक्रव्यूह (Modus Operandi)
 * टेंडर की शर्तें कस्टमाइज्ड: मनपसंद वेंडर्स को ठेका दिलाने के लिए GeM पोर्टल पर नियमों को धता बताकर ऐसी तकनीकी शर्तें (Filters) जोड़ी गईं, जिससे सिर्फ सिंडिकेट से जुड़ी चुनिंदा फर्में ही क्वालिफाई कर सकें।
 * L1 फिक्सिंग और सिंडिकेट बिडिंग: मिलीभगत के तहत कई फर्जी डमी फर्मों से ऊंची दरों की बिड लगवाई गई और पहले से तय चहेती फर्म को ‘न्यूनतम दर’ (L1) का तमगा दिलाकर टेंडर दे दिया गया।
 * बाजार से कई गुना अधिक दरें: झाड़ू, स्ट्रीट लाइट, डस्टबिन, सैनिटाइजेशन केमिकल से लेकर भारी मशीनरी तक बाजार मूल्य से 200 से 400 प्रतिशत अधिक दामों पर खरीदी दिखाई गई।
 * ‘कागजी’ सप्लाई और असली भुगतान: कई निकायों में जमीनी स्तर पर सामग्री पहुंची ही नहीं, जबकि पोर्टल पर फर्जी स्टॉक एंट्री और एमटीआर (Material Receipt) जनरेट कर चंद घंटों में करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
कटघरे में सीएमओ, इंजीनियर और लेखा शाखा
घोटाले की जड़ें निकायों के शीर्ष प्रशासनिक तंत्र तक फैली हैं। सूत्रों के अनुसार, बिना उच्चाधिकारियों की मूक सहमति के इतने बड़े स्तर पर पोर्टल के एल्गोरिदम को चकमा देना मुमकिन नहीं था। जांच के दायरे में निकायों के तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), कार्यपालन/उपयंत्री (Engineers) और बिल पास करने वाले लेखा अधिकारी सीधे तौर पर आ चुके हैं।
जांच और कार्रवाई का रोडमैप तैयार
 * गहन डिजिटल ई-ऑडिट: MPSEDC की तकनीकी विंग ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में GeM पोर्टल से हुई हर एक खरीद की डिजिटल ट्रैकिंग और ऑडिट शुरू कर दिया है।
 * फर्मों पर एफआईआर और जब्ती: सिंडिकेट में शामिल फर्जी और दागी वेंडर फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने, उनके बैंक खाते सीज करने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
 * प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट: वित्तीय अनियमितता में संलिप्त अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय चार्जशीट के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की तैयारी है।
 * एसआईटी (SIT) गठन की सुगबुगाहट: मामले की अंतर-निकाय व्याप्ति को देखते हुए शासन स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञों और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को शामिल कर विशेष जांच दल गठित करने पर विचार चल रहा है।
 “शासकीय धन पर डाका डालने और डिजिटल व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। नियमों की अनदेखी कर किए गए हर एक संदिग्ध भुगतान की पाई-पाई जांची जाएगी और जवाबदेही तय कर सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई होगी।”
 — संजय दुबे, अतिरिक्त मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन
सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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