कागजों में सिमटा ‘सबका विकास’: जमुनिया में सरपंच की मनमानी चरम पर, बेबस महिला उप-सरपंच न्याय की गुहार लगाने को मजबूर

अधिकारियों की चुप्पी से गहराया रोष, ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

मझौली (जबलपुर)

ग्राम स्वराज और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े सरकारी दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो तो जनपद पंचायत मझौली की ग्राम पंचायत जमुनिया का रुख कीजिए। यहाँ ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा केवल सरकारी विज्ञापनों और फाइलों तक सिमट कर रह गया है। पंचायत में सरपंच के कथित तानाशाही रवैये से न केवल आम ग्रामीण त्रस्त हैं, बल्कि खुद महिला उप-सरपंच अपने अधिकारों की रक्षा और न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। ऐसे में यह सवाल सीधे प्रशासन के मुंह पर तमाचा जड़ता है कि जिस पंचायत में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि ही लाचार हो, वहाँ आम गरीब की फरियाद कौन सुनेगा?

पंचायती राज को ताक पर रखकर एकतरफा फैसले

स्थानीय ग्रामीणों और पंचों का सीधा आरोप है कि पंचायत को जनता की राय से नहीं, बल्कि निजी जागीर की तरह चलाया जा रहा है। महिला उप-सरपंच ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि पंचायत की बैठकों और विकास कार्यों में उनकी राय लेना तो दूर, उन्हें बोलने का मौका तक नहीं दिया जाता। लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला उल्लंघन करते हुए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन आम बात हो चुकी है।

विकास में पक्षपात और योजनाओं में खुली धांधली

गाँव में विकास के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। बुनियादी ढांचे की स्थिति बदहाल है और ग्रामीणों के गंभीर आरोप सामने आए हैं:

 * चुनिंदा विकास कार्य: गाँव की नालियाँ बजबजा रही हैं, सड़कों की हालत खस्ता है और पेयजल संकट बना हुआ है। निर्माण कार्य सिर्फ वहीं कराए जा रहे हैं जहाँ से निजी लाभ जुड़े हों।

 * हितग्राहियों के हक पर डाका: प्रधानमंत्री आवास योजना, संबल कार्ड और खाद्यान्न वितरण जैसी अहम योजनाओं में भारी हेरफेर का आरोप है। वास्तविक पात्र हितग्राही दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि अपात्रों को उपकृत किया जा रहा है।

 * गोपनीयता का खेल: पंचायत के बजट, निर्माण की लागत और ग्राम सभा की कार्यवाहियों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है ताकि वित्तीय अनियमितताओं पर पर्दा पड़ा रहे।

अधिकारियों की चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में प्रशासनिक उदासीनता सबसे चिंताजनक पहलू बनकर उभरी है। ग्रामीणों का कहना है कि जनपद पंचायत मझौली के आला अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से कई बार अवगत कराया गया, मगर नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ रहा। अफसरों की इस संदिग्ध चुप्पी से सरपंच के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जाँच नहीं कराई और तानाशाही रवैये पर लगाम नहीं कसी, तो वे जनपद कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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