विकास के दावों की खुली पोल: बिलगुवां के आदिवासी टोले में आज तक नहीं पहुंची सड़क, खाट पर अस्पताल जा रहीं गर्भवती महिलाएं

 एक तरफ सरकार ग्रामीण अंचलों तक पक्की सड़कों का जाल बिछाने और अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर दमोह जिले की जनपद पंचायत पटेरा अंतर्गत ग्राम बिलगुवां का आदिवासी टोला आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

पटेरा (दमोह)

आजादी के दशकों बीत जाने के बाद भी यहां लगभग 300 की आबादी पक्की सड़क और नाले पर पुलिया न होने से नारकीय जीवन जीने को मजबूर है।

दमोह-कटनी मार्ग से मात्र 1.5 किमी दूर, फिर भी विकास से कोसों दूर

बिलगुवां गांव दमोह-कटनी मुख्य मार्ग से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुख्य मार्ग और टोले के बीच एक नाला पड़ता है, जिस पर बनी रपट की ऊंचाई अत्यंत कम है। बरसात का मौसम आते ही यह नाला उफान पर आ जाता है, जिससे इस टोले का संपर्क मुख्य मार्ग और पूरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। ग्रामीण कई-कई दिनों तक अपने ही गांव में कैद होकर रह जाते हैं।

जिंदगी पर भारी बदहाली: डोली-खाट ही एकमात्र एंबुलेंस

सड़क के अभाव का सबसे भयावह पहलू स्वास्थ्य आपातकाल के समय देखने को मिलता है। गांव तक एंबुलेंस या कोई चारपहिया वाहन नहीं पहुंच पाता। प्रसव पीड़ा से कराहती गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को ग्रामीण जान जोखिम में डालकर खाट (डोली) पर लादते हैं और कीचड़ भरे रास्ते व उफनते नाले को पार कराकर डेढ़ किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग तक लाते हैं। जरा सी चूक किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।

कीचड़ में फंसा मासूमों का भविष्य

इस मार्ग पर जलभराव और दलदल के कारण गांव के बच्चों की शिक्षा पर भी गहरा संकट मंडरा रहा है। बारिश के दिनों में स्कूली छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर नाला पार करने को मजबूर हैं, या फिर हफ्तों तक स्कूल नहीं जा पाते। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है।

कलेक्टर से लेकर पीएमओ तक भेजी गई शिकायत

प्रशासनिक उपेक्षा से आक्रोशित समस्त ग्रामवासियों ने एकजुट होकर दमोह कलेक्टर को औपचारिक मांग-पत्र सौंपा है। इसके साथ ही क्षेत्रीय सांसद, कमिश्नर (सागर संभाग) और प्रधानमंत्री कार्यालय (साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली) को भी प्रतिलिपि भेजकर स्थायी सड़क व उच्च स्तरीय पुलिया निर्माण की गुहार लगाई गई है।

ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही सड़क निर्माण की स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ नहीं कराया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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