टिकुरी पंचायत में शांति धाम मार्ग निर्माण में खुला बड़ा खेल धरातल पर सड़क गायब, कागजों में लाखों डकार गए जिम्मेदार: 

स्वीकृति ₹3.66 लाख की, बिना एक तसली गिट्टी डाले निकल गए ₹2.52 लाख; फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के पुख्ता साक्ष्यों के साथ जिला पंचायत CEO से सीधी शिकायत

जबलपुर / मझौली

मध्य प्रदेश शासन द्वारा ग्रामीण विकास और मूलभूत सुविधाओं के नाम पर भेजी जा रही सरकारी राशि का किस कदर बंदरबांट होता है, इसका जीता-जागता और चौंकाने वाला प्रमाण मझौली विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत टिकुरी में सामने आया है। यहां अंतिम संस्कार के लिए जाने वाले मुक्तिधाम (शांति धाम) पहुंच मार्ग के नाम पर शासन से लाखों रुपये की स्वीकृति तो करा ली गई, लेकिन धरातल पर कार्य की एक ईंट भी नहीं रखी गई और मिलीभगत कर शासकीय खजाने से ₹2,52,000 की मोटी रकम आहरित कर ली गई।

मामले की भनक लगते ही सजग ग्रामीणों ने दस्तावेजी साक्ष्य जुटाकर पूरे घालमेल की परतें उधेड़ दी हैं। शुक्रवार को ग्रामीणों ने जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को 8 पन्नों के पुख्ता सबूतों के साथ लिखित शिकायत सौंपते हुए सरपंच, सचिव और संबंधित फर्म के विरुद्ध गबन, टैक्स चोरी व जालसाजी की धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की मांग की है।

दो माह से राह ताक रहे ग्रामीण, कागजों में ‘दौड़’ गई सड़क

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, टिकुरी में शांति धाम सड़क निर्माण कार्य हेतु कुल ₹3,66,000 (तीन लाख छियासठ हजार रुपये) की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई थी। स्वीकृति मिले दो माह से अधिक का समय बीत चुका है, किंतु आज भी मौके पर न तो कोई समतलीकरण हुआ और न ही गिट्टी-सीमेंट पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि जिस रास्ते से अर्थियां गुजरती हैं, उस संवेदनशील मार्ग की राशि डकारने में भी पंचायत के जिम्मेदार तनिक नहीं हिचके। आरोप है कि सरपंच श्रीमती सीता देवी चौकसे, सचिव संतोष जैन और निजी वेंडर ‘विश्वकर्मा ट्रेडर्स’ ने साठगांठ कर सड़क शुरू होने से पहले ही 2 जुलाई 2026 को ₹2.52 लाख का भुगतान निकाल लिया।

पड़ताल में खुलीं फर्जीवाड़े की तीन बड़ी परतें:

1. हमनाम बिलों से डबल निकासी (बिल नं. 941 और 0941):

आहरण के लिए जो बिल लगाए गए हैं, वे पहली नजर में ही फर्जीवाड़े की गवाही दे रहे हैं। 2 जुलाई 2026 को ₹1,26,000 और ₹1,26,000 के दो एकसमान बिल जारी किए गए। एक का क्रमांक 941 और दूसरे का 0941 दर्ज है। एक ही तारीख में, एक ही फर्म से, समान राशि के समानांतर बिल लगाकर दोहरी निकासी का खुला खेल खेला गया।

2. बिना GST नंबर के बिल और खुलेआम टैक्स चोरी:

विश्वकर्मा ट्रेडर्स द्वारा प्रस्तुत बिलों में कोई भी अधिकृत GST नंबर अंकित नहीं है। इसके बावजूद बिल में 5% की दर से टैक्स जोड़ा गया। नियम यह कहता है कि यदि टैक्स जोड़ा जा रहा है तो गिट्टी पर 5% और सीमेंट पर 18% टैक्स का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए था, जिसके हिसाब से वास्तविक टैक्स राशि लगभग ₹17,700 बनती है। परंतु टैक्स चोरी और फर्जीवाड़े को छिपाने के लिए मनमाने ढंग से फ्लैट 5% जोड़कर सरकारी राजस्व को भी सीधे तौर पर चूना लगाया गया है।

3. पंचायत दर्पण पोर्टल बनाम कागजी बिल — सील-दस्तखत तक नदारद:

शासकीय पोर्टल ‘पंचायत दर्पण’ पर अपलोड आंकड़ों और भौतिक बिलों में जमीन-आसमान का अंतर है। पोर्टल पर टुकड़ों में आहरण (₹32,000 व ₹94,000) दिखाया जा रहा है, जबकि पेश किए गए बिलों पर न तो ग्राम पंचायत सरपंच के हस्ताक्षर व सील हैं और न ही सचिव द्वारा इसे प्रमाणित किया गया है। बिना सक्षम हस्ताक्षर के लाखों का भुगतान कैसे पास हो गया, यह जांच का गंभीर विषय है।

ग्रामीणों ने सौंपे अकाट्य साक्ष्य; FIR और रिकवरी की मांग

शिकायतकर्ता सुरेश बर्मन, राजगोपाल तिवारी एवं प्रफुल्ल खरे सहित अन्य ग्रामीणों ने जिला पंचायत CEO के समक्ष निम्नलिखित साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं:

 * स्वीकृत सड़क की तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृति आदेश की प्रति।

 * वर्तमान कार्यस्थल (खाली पड़ी जमीन) की लाइव फोटोग्राफ।

 * बिना GST और संदिग्ध क्रमांक वाले दोनों फर्जी बिलों की मूल छायाप्रति।

 * बैंक आहरण एवं पोर्टल विवरण से जुड़े कुल 8 पन्नों का दस्तावेज।

“शांति धाम जैसे पवित्र और जनहितैषी कार्य की राशि में यह खुला डाका है। जब धरातल पर काम ही नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर किया गया? यह सीधे-सीधे शासकीय धन का दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र है। यदि तत्काल निष्पक्ष जांच कर आरोपियों पर FIR और राशि वसूली नहीं की गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

 — सुरेश बर्मन, राजगोपाल तिवारी, प्रफुल्ल खरे (शिकायतकर्ता ग्रामीण)

आगे क्या?

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिला पंचायत स्तर पर शिकायत को संज्ञान में लेकर संबंधित जनपद व तकनीकी अमले को मौके की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस बहुचर्चित सड़क घोटाले में संलिप्त सफेदपोशों और लापरवाह कर्मचारियों पर प्रशासन का चाबुक कब चलता है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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