विकास के दावों की खुली पोल: दलदल में तब्दील हुआ मुख्य मार्ग, टापू बने जबलपुर के 7 गांव; कीचड़ में सन रहा मासूमों का भविष्य

एक तरफ जहां सरकारें ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्मार्ट विलेज’ और ‘चमकती सड़कों’ का ढोल पीटते नहीं थकतीं, वहीं मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कटंगी क्षेत्र से विकास के इन दावों को आईना दिखाती एक बेहद शर्मनाक और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है।

(कटंगी/जबलपुर):*

कटंगी का एक प्रमुख मार्ग, जो आधा दर्जन से अधिक गांवों को तहसील और जिला मुख्यालय से जोड़ता है, आज प्रशासनिक अनदेखी के कारण एक गहरे तालाब और जानलेवा दलदल में तब्दील हो चुका है। स्थिति इतनी बदतर है कि इस मार्ग पर पैदल चलना भी मौत को दावत देने जैसा है।

नारकीय जीवन जीने को मजबूर 7 गांवों की आबादी

कटंगी क्षेत्र के चराग्वा, अकौना, दोहरा, कूड़ा और देवीरी समेत कुल 7 गांवों की जीवन रेखा कहा जाने वाला यह मुख्य मार्ग इस समय पूरी तरह मलबे और कीचड़ के सैलाब में डूब चुका है। बारिश के आते ही इन गांवों का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है और यह पूरा इलाका एक कटे हुए टापू का रूप ले लेता है।

ग्राउंड जीरो पर ग्रामीणों का दर्द और बेबसी:

 कीचड़ में सने मासूम कदम: हर सुबह जब देश के नौनिहाल अपने उज्जवल भविष्य का सपना लेकर स्कूलों के लिए निकलते हैं, तो उन्हें इस बदसूरत दलदल से दो-चार होना पड़ता है।

 आंसुओं में भीगती पढ़ाई: स्थानीय ग्रामीणों ने रुंधे गले से बताया कि आए दिन बच्चे इस गहरे कीचड़ में संतुलन खोकर गिर जाते हैं। उनकी साफ-सुथरी यूनिफॉर्म कीचड़ से सन जाती है, बस्ते में रखी किताबें-कॉपियां पानी में गल जाती हैं। नतीजतन, ये बच्चे रोते हुए मायूस होकर घर लौट आते हैं। कई दिनों तक तो बच्चे स्कूल जा ही नहीं पाते।

 स्वास्थ्य सेवाओं का जनाजा:इस बदहाली ने इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं को भी वेंटिलेटर पर ला दिया है। यदि गांव में कोई गंभीर बीमार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हो, तो एंबुलेंस गांव की सीमा के बाहर ही खड़ी रह जाती है। मरीज को खाट पर लादकर दलदल पार कराना ग्रामीणों की नियति बन चुका है।

जनप्रतिनिधि नदारद, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

ग्रामीणों की दो टूक:”चुनाव आते ही बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता और जनप्रतिनिधि एसी गाड़ियों में बैठकर वोट मांगने तो आ जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे इन गांवों को भूल जाते हैं। सालों से हम इस नारकीय जीवन को झेल रहे हैं, लेकिन हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है।”

तीखे सवाल: कब टूटेगी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद?

इस जमीनी हकीकत को देखने के बाद यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की जड़ें कितनी गहरी हैं। इस रिपोर्ट के माध्यम से शासन-प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) से कुछ सीधे सवाल हैं:

 1. बुनियादी हक से महरूपी क्यों?: क्या इन 7 गांवों के नागरिकों ने सरकार को टैक्स देना बंद कर दिया है, जो उन्हें एक अदद चलने लायक सड़क भी मयस्सर नहीं हो रही?

 2. कैसा डिजिटल इंडिया?: 21वीं सदी के भारत में, जहां हम चांद-सूरज तक पहुंच रहे हैं, वहां हमारे बच्चे सड़क के अभाव में स्कूल जाने से महरुम क्यों हैं?

 3. हादसे का इंतजार क्यों?: क्या स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे, किसी मासूम की जान जाने या इस कीचड़ से महामारी फैलने का इंतजार कर रहे हैं

यह रिपोर्ट सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों और बिलखते बच्चों की चीख है जो व्यवस्था की बेरुखी का शिकार हैं। उम्मीद है कि इस विशेष रिपोर्ट के बाद नींद का ढोंग कर रहा प्रशासन जागेगा और कागजी दावों से इतर धरातल पर जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण शुरू कराया जाएगा, ताकि इन 7 गांवों को इस नारकीय दलदल से मुक्ति मिल सके।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

Latest News

Stay Connected

0FansLike
29FollowersFollow
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Most View