रास्ते के अवैध निर्माण का विरोध करने पर दबंगों ने दो बार की थी बर्बर मारपीट
* मझौली पुलिस ने खानापूर्ति कर काटी असंज्ञेय एनसीआर, थाने से लौटते वक्त फिर पीटा गया था पीड़ित
* पीएम रिपोर्ट में शरीर पर चोटों और हैंगिंग की पुष्टि, पीड़ित पिता ने एसपी से लगाई एफआईआर की गुहार
मझौली दर्पण ब्यूरो / मझौली (जबलपुर)
मझौली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम शंकरगढ़ कॉलोनी (नरीला) में दबंगई, खुलेआम गुंडागर्दी और खाकी की कथित उदासीनता के चलते एक दलित युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी। आम रास्ते पर अवैध निर्माण का विरोध करने पर तीन युवकों द्वारा सरेआम बेइज्जत कर बेरहमी से पीटे जाने से आहत महेश बैन (35 वर्ष) ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद मझौली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित पिता ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) जबलपुर और अजाक (हरिजन) थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर तीनों दबंगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए विवश करने व एट्रोसिटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
रास्ते के निर्माण का विरोध करने पर सरेराह पीटा
मृतक के पिता शिम्मू बैन द्वारा पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, घटना 23 जुलाई 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे की है। ग्राम शंकरगढ़ नरीला निवासी मनीष राजपूत अपनी ससुराल में मकान का निर्माण करा रहा था। आरोप है कि मनीष आम रास्ते पर आगे बढ़ाकर दीवार बना रहा था, जिससे शिकायतकर्ता और मृतक महेश बैन के आवागमन का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो रहा था। जब महेश बैन ने सार्वजनिक रास्ते को बंद करने का विरोध किया, तो मनीष राजपूत, संदीप राजपूत और झल्लू सिंह राजपूत आगबबूला हो गए। तीनों ने मिलकर महेश को गाली-गलौज करते हुए लात-घूंसों से लहूलुहान कर दिया और सरेराह अपमानित किया। घटना को मृतक की मां द्रोपती बाई और पत्नी ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और बीच-बचाव की कोशिश की।
पुलिस ने सिर्फ एनसीआर काटी, थाने से लौटते वक्त फिर घेरा
आरोप है कि लहूलुहान हालत में जब महेश बैन न्याय की गुहार लगाने मझौली थाने पहुंचा, तो पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय औपचारिकता निभाते हुए मात्र धारा 115(2) बीएनएस के तहत असंज्ञेय अपराध (NCR क्र. 0569/2026) काटकर पल्ला झाड़ लिया और फरियादी को न्यायालय जाने की समझाइश देकर रवाना कर दिया। पुलिस के इस लचर रवैये से दबंगों के हौसले और बढ़ गए। आरोप है कि थाने से रिपोर्ट कराकर लौटते समय आरोपियों ने रास्ते में महेश को दोबारा रोक लिया और फिर से बेरहमी से मारपीट की। इसके बाद आरोपी लगातार घर के सामने आकर मां-बहन की गंदी गालियां देकर जान से मारने की धमकियां देते रहे।
अपमान का घूंट नहीं पी सका महेश, 26 जुलाई की रात उठाया आत्मघाती कदम
सरेराह हुई दोहरी मारपीट, थाने से निराशा और घर के बाहर लगातार हो रहे अपमान से महेश बैन मानसिक रूप से टूट गया। इस असहनीय सामाजिक जलालत और प्रताड़ना के चलते उसने 26 जुलाई 2026 की रात अपने घर में फांसी का फंदा लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। अगली सुबह घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम कराया।
पीएम रिपोर्ट में शरीर पर चोटों के निशान दर्ज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मझौली में हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ने भी परिजनों के आरोपों को पुष्ट किया है। रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के माथे (Forehead) पर 1×0.5 इंच का घसीट/खरोंच (Abrasion) और कंधे के पास 1×1 इंच का अंदरूनी चोट (Contusion) दर्ज हुआ है। डॉक्टरों ने मौत का प्राथमिक कारण फांसी के चलते दम घुटना (Asphyxia resulting in cardiopulmonary arrest) स्पष्ट किया है।
‘पैसों के बल पर आरोपियों को संरक्षण दे रही मझौली पुलिस’
मृतक के पिता शिम्मू बैन ने मझौली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस घटना स्थल पर सही जांच करने के बजाय आरोपियों को खुलेआम संरक्षण दे रही है। यदि 23 जुलाई को ही पुलिस मारपीट करने वालों पर सख्त कार्रवाई करती, तो आज उनका बेटा जिंदा होता। न्याय के लिए भटक रहे पीड़ित परिवार ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक और अजाक थाने से गुहार लगाई है कि आरोपी संदीप राजपूत, मनीष राजपूत और झल्लू सिंह राजपूत के खिलाफ धारा 108 बीएनएस (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) एवं एससी/एसटी एक्ट के तहत तत्काल मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।