MP में PM पोषण योजना में महाघोटाला! 74,000 से ज्यादा रसोइयों के बैंक खातों में खेल, हर महीने ₹20 करोड़ की हेराफेरी की आशंका

मध्य प्रदेश में स्कूली बच्चों को मिड-डे मील (मध्यान्ह भोजन) मुहैया कराने वाली ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना’ में एक बहुत बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

भोपाल

योजना के आधिकारिक पोर्टल की समीक्षा के दौरान राज्य स्तर पर एक-दो नहीं, बल्कि 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के रजिस्ट्रेशन और भुगतान (Payment) विवरण में गंभीर गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं।

इस बड़े खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है और राज्य सरकार ने आनन-फानन में सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEOs) को तत्काल प्रभाव से जमीनी स्तर पर जांच करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

नाम रसोइया का, खाता किसी और का: कैसे हुआ खेल?

जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह यह है कि पोर्टल पर पंजीकृत हजारों रसोइयों के नाम, पते और आधार जैसी व्यक्तिगत जानकारियां तो सही हैं, लेकिन **भुगतान के लिए दर्ज किए गए बैंक खाते (Bank Accounts) किसी दूसरे व्यक्तियों के हैं।

आशंका जताई जा रही है कि रसोइयों और सहायकों के नाम पर मिलने वाली मानदेय राशि को मिलीभगत करके अज्ञात सिंडिकेट या बिचौलियों के खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था। चूंकि इस योजना के तहत प्रदेश में हर महीने करीब 20 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है, इसलिए इस फर्जीवाड़े का दायरा करोड़ों रुपये का होने का अनुमान है।

सरकार एक्शन मोड में: कलेक्टरों को दिए गए सख्त निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग और शासन स्तर से सभी जिलों को अलर्ट जारी कर दिया गया है।

 त्रिपक्षीय मिलान के निर्देश: कलेक्टरों को आदेश दिए गए हैं कि वे पोर्टल पर दर्ज रसोइया के नाम, उनके वास्तविक बैंक खाते और उनके आधार कार्ड का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करवाएं।

 त्रुटि सुधार और रिकवरी: जिन खातों में विसंगतियां पाई गई हैं, वहां तुरंत भुगतान रोकने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है।

मासूमों के निवाले पर डाका!

यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश में बच्चों से जुड़ी किसी कल्याणकारी योजना में इस तरह का लूपहोल सामने आया हो। इससे पहले भी पोषण आहार और राशन वितरण में गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पारदर्शिता का दावा करती है, वहीं 74 हजार से अधिक खातों में इस तरह का ‘मिसमैच’ होना पूरी मॉनिटरिंग प्रणाली और पोर्टल की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है।

अब देखना यह होगा कि कलेक्टरों की जांच में इस ‘रसोइया घोटाले’ के पीछे के असली मास्टरमाइंड बेनकाब होते हैं या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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