स्वच्छता का ‘कागजी महल’ ढहा! 5 TPD क्षमता का MRF सेंटर सिर्फ दिखावा, बाजार से डस्टबिन गायब, प्लास्टिक खा रहे बेजुबान

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत कागजों पर बड़े-बड़े आंकड़े चमकाकर पीठ थपथपाना कितना आसान है, इसका जीता-जागता उदाहरण देखना हो तो नगर परिषद मझौली (ULB कोड: 802356) का रुख कीजिए।

मझौली/जबलपुर 

यहाँ प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला इतना चौड़ा हो चुका है कि पूरा नगर परिषद क्षेत्र अब कचरे के बड़े ढेर में तब्दील हो गया है। एक तरफ मुख्य मार्गों पर 5 TPD (टन प्रति दिन) की भारी-भरकम क्षमता वाले भव्य ‘मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर’ और 3R (Reduce, Reuse, Recycle) तकनीक के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर वाहवाही लूटी जा रही है, तो वहीं दूसरी तरफ शहर के दिल कहे जाने वाले मुख्य बाजारों और व्यस्त चौराहों से बुनियादी डस्टबिन (कचरा पेटियां) ही गायब हैं। करोड़ों रुपये के बजट वाले इस स्वच्छता अभियान की हवा निकल चुकी है।

नो डस्टबिन जोन’ बने मुख्य बाजार: व्यापारी और राहगीर लाचार

मझौली के बस स्टैंड, मुख्य बाजार, गल्ला मंडी रोड और प्रमुख चौराहों की स्थिति यह है कि स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों के पास कचरा सड़क पर फेंकने के अलावा कोई दूसरा विकल्प ही नहीं बचा है। डस्टबिन न होने के कारण रोज सुबह से ही सड़कों पर गंदगी का अंबार लगना शुरू हो जाता है। दोपहर होते-होते हवा के झोंकों के साथ यह सूखा कचरा, पॉलिथीन और डिस्पोजल सामग्री पूरी सड़क पर बिखर जाती है, जिससे राहगीरों और दुकानदारों का निकलना मुहाल हो गया है। स्थानीय दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि महीनों पहले जो डस्टबिन टूट गए या चोरी हो गए, उनकी जगह नए डस्टबिन लगाने की जहमत नगर परिषद के अधिकारियों ने आज तक नहीं उठाई।

मूक पशुओं के लिए ‘डेथ वारंट’ बना डंपिंग ग्राउंड

इस प्रशासनिक घोर लापरवाही का सबसे वीभत्स और हृदयविदारक रूप मझौली के बाजारों में हर रोज देखने को मिलता है। गीले कचरे और सड़े-गले भोजन की तलाश में लावारिस मूक पशु, विशेषकर गायें, इन कचरे के ढेरों पर मुंह मारने को मजबूर हैं। भोजन के चक्कर में ये बेजुबान जानवर भारी मात्रा में सिंगल-यूज प्लास्टिक, घातक पॉलिथीन और नुकीली मेटल की वस्तुएं निगल रहे हैं। यह स्थिति न केवल पशु क्रूरता की पराकाष्ठा है, बल्कि उनके जीवन के लिए एक सीधा मौत का जाल बन चुकी है। पर्यावरण और भूजल को बचाने के वैज्ञानिक दावे करने वाली नगर परिषद आज इन मूक पशुओं के पेट में जमा हो रहे धीमे जहर पर पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठी है।

मझौली दर्पण का सीधा सवाल: जब इनपुट ही नहीं, तो आउटपुट किसका?

नगर परिषद का बोर्ड चिल्ला-चिल्लाकर 5,000 किलो रोजाना कचरा प्रोसेसिंग की क्षमता का बखान करता है। लेकिन मझौली दर्पण प्रशासन से यह तीखा और सीधा सवाल पूछता है:

“जब शहर के सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्रों और वार्डों से कचरा उठाने की प्राथमिक कतरन (डस्टबिन व्यवस्था) ही धरातल से नदारद है, तो फिर यह 5 TPD का सेंटर रोजाना किस कचरे को रिसाइकिल कर रहा है? क्या यह पूरी कवायद सिर्फ सरकारी फाइलों को दुरुस्त रखने और बजट को ठिकाने लगाने का एक जरिया मात्र है?”

कटघरे में जिम्मेदार: इन तीन सवालों का जवाब दे परिषद

 सवाल नंबर 1: स्वच्छता अभियान और डस्टबिन खरीदी के नाम पर जो लाखों-करोड़ों का वित्तीय बजट आवंटित हुआ, उसका वास्तविक हिसाब कहाँ है? ग्राउंड से डस्टबिन क्यों गायब हैं? क्या इसकी कोई उच्च स्तरीय जांच होगी?

 सवाल नंबर 2: मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) और परिषद का स्वच्छता अमला इस भीषण गंदगी और प्लास्टिक खाती गायों की दुर्दशा पर मौन क्यों साधे हुए है? इन मूक पशुओं की मौतों की जवाबदेही कब तय होगी?

 सवाल नंबर 3: क्या नगर परिषद केवल किसी वीआईपी के दौरे या केवल शासकीय निरीक्षण के दौरान ही कागजी तौर पर सक्रिय होगी? टैक्स भरने वाली आम जनता को इस नरकीय स्थिति से स्थायी निजात कब मिलेगी?

 नगर परिषद मझौली के जिम्मेदार अधिकारी इस खबर के प्रकाशन के बाद कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या अपनी फाइलों में ‘ऑल इज वेल’ का खेल जारी रखते हैं, इस पर हमारी पैनी नजर बनी रहेगी। यदि जल्द ही मुख्य बाजारों में पर्याप्त डस्टबिन नहीं रखे गए और कचरा प्रबंधन को सुचारू नहीं किया गया, तो सजग नागरिकों के साथ मिलकर आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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