स्वच्छता ऐप पर शिकायत की तो निगम कर्मी नरसिंह यादव ने मांगी रिश्वत, शिकायत खारिज कर बोले- ‘दरवाजा ऊपर कर लो, मलबा नहीं हटेगा’
जबलपुर
एक तरफ जबलपुर नगर निगम ने शहर को आधुनिक बनाने के लिए हाल ही में ₹2200 करोड़ का ऐतिहासिक बजट सर्वसम्मति से पारित किया है, जिसमें ₹650 करोड़ सिर्फ सड़क और नाली निर्माण के लिए रखे गए हैं। वहीं दूसरी तरफ, जमीनी हकीकत यह है कि निगम के भ्रष्ट कर्मचारियों और दबंगों के कारण बुजुर्ग नागरिक अपने ही घर में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ऐसा ही एक झकझोर देने वाला मामला अधारताल के संजय नगर (शंकर चौक) से सामने आया है, जहाँ एक 63 वर्षीय वृद्ध महिला को मलबे की सफाई के एवज में नगर निगम कर्मचारी को रिश्वत न देने पर प्रताड़ित और धमकी दी जा रही है।
पड़ोसी के मलबे से थमा जिंदगी का पहिया, घर में घुस रहा पानी
संजय नगर निवासी पीड़ित महिला शांति विश्वकर्मा (63 वर्ष) ने नगर निगम कमिश्नर को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि वे और उनके पति घर पर अकेले रहते हैं, जबकि बच्चे बाहर हैं। उनके पड़ोसी लक्ष्मण पटेल के घर का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसका भारी-भरकम मलबा (मलमा) उनके घर की दीवार से लगी सीसी रोड पर डाल दिया गया है। इस मलबे के कारण मुख्य नाली पूरी तरह जाम हो गई है। बीते 8 अप्रैल को हुई बारिश के दौरान नाली का पूरा गंदा पानी वृद्ध दंपत्ति के घर के भीतर घुस गया, जिससे मकान की दीवारों में भारी रिसाव (सीपेज) हो रहा है। मलबे को हटाने की मिन्नतें करने पर पड़ोसी का बेटा अनिल पटेल बुजुर्गों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की धमकी पर उतारू हो जाता है।
मेयर हेल्पलाइन फेल, स्वच्छता ऐप के कर्मचारी ने मांगी ₹2000 की घूस
पीड़ित महिला ने थक-हारकर नगर निगम की मेयर हेल्पलाइन (शिकायत संख्या: 10956) पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार के ‘स्वच्छता ऐप’ पर अपनी शिकायत (आईडी: W065530C34002802) दर्ज की। शिकायत के बाद वार्ड का संबंधित नगर निगम कर्मचारी नरसिंह यादव (मो. नं. 9179758440) मौके पर पहुँचा। आरोप है कि कर्मचारी ने मलबा साफ करवाने के बदले वृद्ध महिला से ₹2000 की रिश्वत मांगी।
जब बुजुर्ग दंपत्ति ने रिश्वत देने से मना किया, तो कर्मचारी नरसिंह यादव ने दबंग पड़ोसी अनिल पटेल से सांठगांठ कर ली। कर्मचारी ने पीड़िता को डांटते हुए कहा, “तुम लोगों ने यहाँ दरवाजा क्यों बनाया, अपना दरवाजा ऊपर कर लो, मलबा यहाँ से नहीं हटेगा” और बिना कोई सफाई किए ऐप पर शिकायत को खारिज (क्लोज) कर दिया। जब बुजुर्गों ने कमिश्नर से शिकायत की बात कही, तो कर्मचारी और पड़ोसी दोनों ने मिलकर उनका घर तोड़ने की धमकी दे डाली।
स्वच्छता ऐप पर शिकायत दर्ज होने के बाद से आरोपी अनिल पटेल की दबंगई और बढ़ गई है। उसने अपने फेसबुक अकाउंट से पीड़ित वृद्ध दंपत्ति के मकान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर दीं। पोस्ट में मकान को ‘लावारिस’ बताते हुए उसे तोड़ने और उस पर अवैध कब्जा करने जैसी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। इस फेसबुक पोस्ट के बाद से अकेले रह रहे बुजुर्ग दंपत्ति अपनी जान और माल को लेकर बेहद डरे हुए हैं।
बुजुर्ग महिला शांति विश्वकर्मा ने नगर आयुक्त और जबलपुर पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत भेजकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने पत्र में साफ कहा है कि यदि उनके घर या उनकी जान को कोई नुकसान पहुँचता है, तो इसके जिम्मेदार अनिल पटेल का परिवार और जबलपुर नगर निगम प्रशासन होगा। मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद, पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए अतिक्रमण प्रभारी श्री रावत और मुख्य स्वच्छता निरीक्षक आर. पी. अहिरवार को मौके का संयुक्त निरीक्षण करने और तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
अब देखना यह होगा कि ₹2200 करोड़ के बजट वाले हाईटेक नगर निगम का अमला इन बुजुर्गों को न्याय दिला पाता है या रसूखदार और भ्रष्ट तंत्र के आगे यह पीड़ित दंपत्ति बेबस बना रहेगा।




