गर्मी का ‘टॉर्चर’, प्रशासन बेपरवाह;, लेकिन नगर परिषद ने प्याऊ तक नसीब नहीं कराए

आसमान से बरसती आग और लू के थपेड़ों ने मझौली नगर का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

मझौली (मध्य प्रदेश)

एक ओर जहां शासन-प्रशासन बढ़ते तापमान को देखते हुए एडवाइजरी जारी कर रहा है कि नागरिक बिना सिर ढके या बिना गमछा लपेटे घर से बाहर न निकलें, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नगर परिषद इस भीषण आपदा में भी कुंभकर्णी नींद सो रही है। नगर के मुख्य बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर एक भी सरकारी प्याऊ की व्यवस्था न होने से राहगीर बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।

बढ़ते तापमान ने घरों से निकलना दूभर कर दिया है। सरकार की ओर से बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि लू से बचने के उपाय करें, लेकिन जब ग्रामीण इलाकों से लोग खरीदारी या जरूरी काम के लिए मझौली के मेन मार्केट पहुंचते हैं, तो उन्हें न तो बैठने के लिए छाया मिलती है और न ही गले को तर करने के लिए शीतल जल।

बुझ गई प्यास की उम्मीद: नगर परिषद मझौली ने इस बार अब तक सार्वजनिक प्याऊ (जल सेवा) की शुरुआत नहीं की है।

मजबूरी की खरीद: भीषण गर्मी में गरीब मजदूर और ग्रामीण ₹20 की पानी की बोतल खरीदने को मजबूर हैं या फिर होटलों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं।

शून्य व्यवस्था: बस स्टैंड, तहसील कार्यालय और मुख्य बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में ठंडे पानी की कोई सरकारी मशीन या मटके तक नजर नहीं आ रहे हैं।

एक तरफ सरकार एक पेड़ माँ के नाम’ और ‘एक बगिया माँ के नाम’ जैसे भावनात्मक विज्ञापनों के जरिए पर्यावरण प्रेम जता रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मझौली के बाजार से पुराने नीम और बरगद के पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। अब न तो वहां छाया बची है और न ही प्रशासन ने प्याऊ लगाकर अपनी जिम्मेदारी निभाई है।

प्रशासन के दावे | जमीनी हकीकत

हीटवेव एडवाइजरी | बिना पानी और छाया के सड़कों पर लोग बेहाल। |

पेयजल व्यवस्था | सार्वजनिक प्याऊ पूरी तरह ठप। |

|वृक्षारोपण अभियान | बाजार में छाया के लिए एक भी पेड़ नहीं बचा। |

राहगीरों और दुकानदारों में भारी रोष

बाजार आए ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर योजनाएं चलाता है। यदि किसी को लू लग जाए, तो अस्पताल जाने से पहले रास्ते में पानी पीने तक की जगह नहीं है।

साहब, गमछा तो लपेट लिया, लेकिन पेट की आग और गले की प्यास कैसे बुझाएं? बाजार में कहीं एक मटका पानी तक नहीं रखा गया है। नगर परिषद को हमारी तकलीफों से कोई लेना-देना नहीं है।”

एक परेशान राहगीर जिम्मेदारों की उदासीनता

हैरानी की बात यह है कि हर साल गर्मियों के लिए अलग से बजट और व्यवस्थाओं के निर्देश होते हैं, फिर भी मझौली नगर परिषद ने अब तक प्याऊ की व्यवस्था क्यों नहीं की? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या लू से होने वाली अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

की जनता आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। सरकार की योजनाएं ‘शून्य’ साबित हो रही हैं और स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता ने इस भीषण गर्मी को जनता के लिए जानलेवा बना दिया है।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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