तहसील मझौली में पटवारियों के हल्का क्षेत्र में अनिवार्य निवास को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
मझौली जबलपुर
सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने से अब पूरा मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है।
मझौली निवासी शिवम साहू ने 12 दिसंबर 2025 को तहसील कार्यालय मझौली के लोक सूचना अधिकारी को आरटीआई आवेदन देकर पूछा था कि हल्का क्षेत्र में नियुक्त पटवारी अपने-अपने क्षेत्र में निवास कर रहे हैं या नहीं, तथा इस नियम का पालन किस प्रकार कराया जा रहा है। लेकिन आरोप है कि निर्धारित 30 दिनों की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
सूचना नहीं मिलने से आक्रोशित आवेदक ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिहोरा के समक्ष प्रथम अपील दायर कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रथम अपीलीय अधिकारी ने तहसीलदार एवं लोक सूचना अधिकारी मझौली से जवाब मांगा है और 11 मार्च 2026 को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई है।
माना जा रहा है कि यदि पटवारी अपने निर्धारित हल्का क्षेत्र में निवास नहीं कर रहे हैं तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा और राजस्व संबंधी अन्य कार्यों के लिए ग्रामीणों को बार-बार तहसील या शहर के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
आरटीआई के जरिए उठे इस मुद्दे ने अब यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वर्षों से सेवा नियमों का उल्लंघन हो रहा था और उसे छिपाने की कोशिश की जा रही थी? यदि ऐसा पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार भी लटक सकती है।
आवेदक का कहना है कि यदि प्रथम अपील में भी पूरी जानकारी नहीं दी गई तो वे राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर कर जुर्माना और मुआवजे की मांग करेंगे।
अब सभी की नजर 11 मार्च की सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि सच सामने आता है या प्रशासनिक चुप्पी बरकरार रहती है।
रिपोर्ट: सुंदर लाल बर्मन
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