मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में फैली अव्यवस्था अब केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनलेवा संकट बन चुकी है।
भोपाल/जबलपुर
इंदौर के एमवाय अस्पताल (MYH) और जबलपुर मेडिकल कॉलेज में सामने आए गंभीर मामलों के बाद अब जिला अस्पताल विक्टोरिया के हड्डी वार्ड से आई तस्वीरों ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां मरीजों के बेड तक चूहे खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं जो व्यवस्था की बदहाली का भयावह उदाहरण है।
सबसे चिंताजनक मामला 10 वर्षीय बच्चे के इलाज के दौरान सामने आया, जब वार्ड में चूहों का आतंक देखा गया। यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि उस स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई है, जहां तीन महीने पहले नवजातों की मौत, मरीजों के पैर कुतरे जाने और संक्रमण फैलने की घटनाएं पहले ही उजागर हो चुकी हैं। इसके बावजूद हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात में संक्रमण फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे मरीजों की जान पर सीधा खतरा मंडराने लगता है। सवाल यह है कि जहां अस्पतालों का उद्देश्य जान बचाना है, वहीं अब मरीज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। आरोप लग रहे हैं कि स्वास्थ्य मंत्री और जिम्मेदार अधिकारी जमीनी हकीकत से दूर हैं, जबकि अस्पतालों की बदहाली आम जनता की जान ले रही है। विपक्ष ने इसे सरकार के “सुशासन” के दावों पर करारा प्रहार बताया है।
प्रदेश की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई चाहती है। मांग की जा रही है कि दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही हो, अस्पतालों की स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को युद्धस्तर पर सुधारा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी अस्पताल इलाज का केंद्र बनें, मौत का घर नहीं।




