केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है।
नई दिल्ली
विपक्ष का आरोप है कि बीते 11 वर्षों में नई सोच के बजाय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल की योजनाओं के नाम बदलकर उन्हें नई उपलब्धि के रूप में पेश किया गया। विपक्षी नेताओं ने सूची जारी कर दावा किया कि मनरेगा से लेकर उज्ज्वला, जनधन, स्वच्छ भारत, मेक इन इंडिया, भारतनेट, फसल बीमा, ग्रामीण आवास, डिजिटल इंडिया जैसी कई योजनाएं पूर्ववर्ती ढांचों का ही विस्तार या पुनर्नामकरण हैं।
आरोप है कि सरकार ने “जो पहले से चल रहा था, उसी पर फीता काटा, शिलापट्ट बदले और श्रेय लिया।” स्मार्ट सिटी सहित कुछ योजनाओं पर भी सवाल उठाए गए। हालांकि सरकार समर्थकों का कहना है कि पुनर्गठन, विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन से योजनाओं को नई दिशा मिली। बहस जारी है—रीब्रांडिंग या रिफॉर्म




