आगामी दिनों में एनएच-34 के जबलपुर कटंगी बायपास से दमोह मार्ग तक फोरलेन निर्माण प्रस्तावित है।
जबलपुर/बोरिया
तीन साल से चर्चाओं में चल रहे इस प्रोजेक्ट को लेकर अब तक सड़क चौड़ीकरण की स्पष्ट माप तय न होना ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता बन गया है। 80 फीट से 150 फीट तक अलग-अलग अटकलें ग्रामीणों को भय और अनिश्चितता में डाल रही हैं।
बोरिया गांव में सड़क के किनारे बसे दर्जनों घर इस क्षेत्र में आते हैं, जहां डिजिटल नक्शों में दिख रहा संभावित निर्माण इन घरों के पूर्णत: ध्वस्त होने की आशंका दर्शा रहा है। यही वजह है कि ग्रामीण न तो नए निर्माण कार्य कर पा रहे और न ही अपने मकानों की मरम्मत। गांव में दहशत, असमंजस और नाराज़गी का माहौल कायम है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि— सड़क चौड़ीकरण सेंटर लाइन से समान माप लेकर किया जाए
बोरिया गांव के बाहर से बायपास निकाला जाए
स्थल निरीक्षण कर ग्रामीणों की सहमति से माप निर्धारण किया जाए
इसी मुद्दे को लेकर बोरिया ग्राम के प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के नागपुर कार्यालय पहुँचकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि दल में ऋषि भान सिंह ठाकुर के नेतृत्व में विनय साहू, विकास राजपूत, सत्यम राजपूत, बंटू राजपूत, साहिल राजपूत, मनीष सिंह, निशांत कुमार, शिवम् सिंह राजपूत आदि शामिल रहे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्रामीणों ने मंत्री को परियोजना से जुड़ी वास्तविक स्थिति और संभावित समस्याओं से अवगत कराया। जिस पर गडकरी ने आश्वासन देते हुए कहा—जनहित सर्वोपरि है, प्रभावितों की राय का सम्मान करते हुए ही निर्माण कार्य होगा।”
प्रतिनिधि मंडल ने इस अवसर पर जबलपुर के प्रसिद्ध भेड़ाघाट सीनरी का स्मृति-उपहार भी भेंट किया
स्थानीयों की उम्मीद — विकास भी हो, गांव भी बचे
बोरिया वासी चाहते हैं कि फोरलेन सड़क बने, क्षेत्र में विकास हो — लेकिन विकास की कीमत पर गांव उजड़ना स्वीकार नहीं। अब ग्रामीणों की निगाहें सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।




