मझौली में विकास पर खनन माफिया का पहरा: ‘मुरम हमसे खरीदो, नहीं तो खैर नहीं’; 10 महीने में 6 टेंडर, 4.18 करोड़ की 2 किमी सड़क अटकी

 पीडब्ल्यूडी अफसरों की सरकार को रिपोर्ट— माफिया की मनमानी और महंगे दामों के चलते पीछे हट रहे ठेकेदार

 * विधायक अजय विश्नोई ने उठाए सवाल— क्या सिस्टम से ज्यादा ताकतवर हो गया है खनन माफिया?

 * 14.70 किमी लंबे पोंडा-बचैया मार्ग का काम भी तीन साल से अधूरा, बदले जा चुके तीन पेटी कॉन्ट्रैक्टर

 भोपाल/जबलपुर

जबलपुर जिले की पाटन विधानसभा अंतर्गत मझौली में खनन माफिया के रसूख और समानांतर सरकार के आगे समूचा प्रशासनिक तंत्र बेबस नजर आ रहा है। क्षेत्र में विकास कार्यों की रीढ़ कही जाने वाली सड़कों पर माफिया की ऐसी ‘नाकेबंदी’ है कि निर्माण एजेंसियों को खुलेआम धमकाया जा रहा है—’मुरम सिर्फ हमसे खरीदो, वो भी मुंहमांगे दामों पर।’ बाहर से सामग्री लाने पर सीधे टकराव और काम रोकने की खुली धमकियां दी जा रही हैं। इस सिंडिकेट की मनमानी का सीधा खामियाजा मझौली नगर की जनता भुगत रही है, जहां 4.18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली महज 2 किलोमीटर की शहरी सड़क पिछले एक साल से फाइलों और टेंडरों के चक्रव्यूह में फंसी हुई है।

माफिया के खौफ और आर्थिक दबाव की इस जमीनी हकीकत को खुद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों ने सरकार को भेजी आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज कर स्वीकार किया है।

10 महीने में 6 टेंडर: 2 किमी सड़क के लिए निविदाओं का तमाशा

मझौली नगर में सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर प्रक्रिया प्रशासनिक लाचारी का दस्तावेज बन चुकी है। 10 महीने के भीतर 6 बार प्रक्रिया दोहराई गई, लेकिन हर बार माफिया का गणित विकास पर भारी पड़ा:

 * 13 अक्टूबर 2025: पहला टेंडर जारी हुआ, लेकिन तकनीकी मूल्यांकन में निविदाकर्ता अपात्र साबित हुए।

 * 16 मार्च व 5 जून 2026: दूसरे और तीसरे टेंडर में माफिया के डर और महंगे मटेरियल रेट के चलते एक भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई।

 * 5 जुलाई 2026: चौथे टेंडर में एकमात्र ठेकेदार सामने आया, लेकिन उसने एसओआर (SOR) से 5% अधिक दरें कोट कीं, जिसके चलते प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी।

 * 17 जुलाई 2026: पांचवीं बार जारी टेंडर में भी कोई ठेकेदार आगे नहीं आया।

 * 10 अगस्त 2026: छठी बार निविदाएं आमंत्रित की गईं, जिन्हें आज खोला जाना है।

पोंडा-बचैया मार्ग भी बंधक: 3 साल में बदले 3 पेटी कॉन्ट्रैक्टर

माफिया के रसूख का दायरा सिर्फ नगर की सड़क तक सीमित नहीं है। पाटन क्षेत्र की 14.70 किलोमीटर लंबी पोंडा-बचैया सड़क पिछले तीन साल से अधर में लटकी है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए भूमिपूजन के बावजूद स्थिति यह है कि मुख्य निर्माण एजेंसी काम पूरा कराने के चक्कर में अब तक 3 पेटी कॉन्ट्रैक्टर बदल चुकी है। पीडब्ल्यूडी ने स्वीकार किया है कि स्थानीय स्तर पर मुरम की ब्लैकमेलिंग और बाहर से निर्माण सामग्री न आने देने की माफिया नीति ही इस सड़क के लेट-लतीफी की मुख्य जड़ है।

किसने क्या कहा:

 “पीडब्ल्यूडी के अधिकारी मझौली की सड़क का एक साल में भी टेंडर फाइनल नहीं कर पा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या खनन माफिया सिस्टम से भी ज्यादा मजबूत हो चुका है, जो विकास कार्य ठप करा दे रहा है? पोंडा-बचैया सड़क का चुनाव से पहले भूमिपूजन हुआ था। तीन साल में तीन पेटी कॉन्ट्रैक्टर बदले जा चुके हैं, फिर भी काम अधूरा है। शासन-प्रशासन को इस पर कड़ा रुख अपनाना होगा।”

— अजय विश्नोई, विधायक, पाटन (पूर्व मंत्री)

“मझौली में सड़क निर्माण के लिए दोबारा निविदाएं बुलाई गई हैं। कुछ ठेकेदारों ने प्रस्ताव जमा किए हैं, जिन्हें आज खोला जाएगा। ठेकेदारों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर मुरम की कमी और दरें बहुत ज्यादा हैं। वहीं गिट्टी 70 किलोमीटर दूर मानेगांव से लानी पड़ रही है, जिससे लागत बढ़ रही है।”

— आकाश खरे, कार्यपालन यंत्री (EE), पीडब्ल्यूडी जबलपुर

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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