कमिश्नर वाणिज्य कर के निर्देश पर इंद्राना पहुंची संयुक्त तकनीकी टीम; बिलों व निर्माण कार्यों की शुरू हुई पड़ताल
इंद्राना/जबलपुर:
शासकीय निर्माण कार्यों और ग्राम पंचायतों के विकास मद में फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। इंद्राना स्थित व्यावसायिक फर्म मां नर्मदा ट्रेडर्स (संचालक: मनोज तिवारी) पर वाणिज्य कर विभाग द्वारा निरस्त (कैंसिल) किए जा चुके जीएसटी नंबर का उपयोग कर सरकारी खजाने से लाखों रुपये के बिल पास कराने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत कमिश्नर वाणिज्य कर विभाग, जबलपुर तक पहुंचने के बाद विभाग ने त्वरित संज्ञान लिया और जांच टीम को मौके पर भेजा।
सरकारी खजाने में सेंधमारी का आरोप
पूर्व सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा कमिश्नर को सौंपी गई लिखित शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि फर्म द्वारा अमान्य व रद्द जीएसटी नंबर के आधार पर ग्राम पंचायतों में सामग्री आपूर्ति और निर्माण कार्यों के बिल लगाकर भुगतान प्राप्त किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह नियमों की अनदेखी कर शासकीय राजस्व (जीएसटी) की सीधी चोरी और सरकारी धन के गबन की सोची-समझी साजिश है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच अनिवार्य है।
इंद्राना पहुंची तकनीकी टीम, फाइलों और निर्माण स्थलों की नापजोख
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी व जांच अधिकारियों का संयुक्त दल ग्राम पंचायत इंद्राना पहुंचा। जांच दल में मुख्य रूप से शामिल रहे:
* पुष्पराज सिंह (इंजीनियर)
* प्रमोद पाण्डेय (इंजीनियर/अधिकारी)
* राजेन्द्र कापसे (जांच अधिकारी)
अधिकारियों की टीम ने पंचायत कार्यालय में जमा बिलों, वाउचरों, फर्म के कोटेशनों और वास्तविक कार्यस्थलों का सघन भौतिक सत्यापन शुरू किया। टीम इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही है कि बिलों में दर्शाई गई निर्माण सामग्री वास्तव में धरातल पर उपयोग की गई है या केवल कागजों में खानापूर्ति कर भुगतान आहरित किया गया।
जांच के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि और शिकायतकर्ता उपस्थित रहे। जांच स्थल पर जय ओम सिंह ठाकुर, अनिल जायसवाल, अभय पाण्डेय, सतीश तिवारी, सत्यम सोनी, पूर्व सरपंच वासुदेव पाण्डेय, सुरेश बर्मन, पूर्व सरपंच मनोहर सिंह, नासिर खान, प्रमोद जैन, जय हिंद सोनी, लल्लू बर्मन, रामनारायण असाटी और ब्रजेश असाटी सहित अन्य ग्रामीणों ने जांच दल के समक्ष तथ्य रखे।
उपस्थित नागरिकों ने अधिकारियों से दो टूक मांग रखी:
* रद्द जीएसटी नंबर से जारी सभी बिलों का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
* शासकीय धन के अवैध आहरण पर संबंधित फर्म संचालक और संलिप्त जिम्मेदारों पर आपराधिक प्रकरण (एफआईआर) दर्ज हो।
* आहरित की गई पूरी राशि की शासकीय कोष में तत्काल रिकवरी की जाए।
अधिकारियों का पक्ष:
जांच अधिकारी राजेन्द्र कापसे ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर दस्तावेजों, बिलों और कार्य स्थलों का भौतिक सत्यापन किया गया है। संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल जारी है और विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर कमिश्नर वाणिज्य कर विभाग सहित वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित की जाएगी, जिसके आधार पर नियमानुसार कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी




