खरीदी केंद्रों पर महालूट: किसानों से अवैध वसूली पर विधायक मौन, क्षेत्र में भारी आक्रोश; सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा


पाटन/जबलपुर
क्षेत्र के गेहूं खरीदी केंद्रों पर अन्नदाता किसान दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। एक तरफ आसमान से बारिश और भीषण गर्मी का सितम है, तो दूसरी तरफ खरीदी केंद्रों पर खुलेआम अवैध वसूली का खेल चल रहा है। इस पूरी अव्यवस्था और किसानों के आर्थिक शोषण को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। सोशल मीडिया पर एक जागरूक नागरिक ठा. मनोहर सिंह द्वारा उठाई गई आवाज के बाद अब यह मुद्दा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
सामने आई जानकारी के अनुसार, खरीदी केंद्रों पर नियमों को ताक पर रखकर किसानों से अलग-अलग मदों में अवैध वसूली की जा रही है। किसान भाइयों ने नाम न छापने की शर्त पर और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी आपबीती साझा करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
पल्लेदारी के नाम पर लूट: प्रति क्विंटल 35 से 40 रुपये पल्लेदारी के नाम पर जबरन वसूले जा रहे हैं।
तौल में सीधे डाका: हर एक क्विंटल पर 2 किलो अधिक गेहूं की तौल की जा रही है, जो सीधे तौर पर किसानों की मेहनत पर डाका है।
एंट्री और सैंपल पास कराने की घूस: पोर्टल पर फीडिंग कराने के नाम पर 100 रुपये और गेहूं का सैंपल पास कराने के नाम पर 100 रुपये प्रति किसान लिए जा रहे हैं।
यह स्थिति तब है जब किसान बमुश्किल स्लॉट बुक कर पा रहे हैं, और केंद्रों पर कड़कती धूप और लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
इस महालूट के बीच सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय जन-प्रतिनिधि की भूमिका पर उठ रहा है। ठा. मनोहर सिंह ने अपनी पोस्ट के माध्यम से क्षेत्रीय विधायक पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि किसानों के पक्ष में विधायक जी का एक शब्द न बोलना उनकी मूक सहमति को दर्शाता है।
आरोप लगाया गया है कि यदि विधायक जी अभी कमियां उजागर कर देंगे तो यह पूरा ‘खेल’ बंद हो जाएगा। जब खरीदी संपन्न हो जाएगी और सारा मुनाफा तय जगह पहुंच जाएगा, तब दिखावे के लिए मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी जाएगी ताकि जनता को मूर्ख बनाया जा सके और उनकी ‘चिल्लर सेना’ (समर्थक) यह ढिंढोरा पीट सके कि विधायक जी को किसानों की कितनी चिंता है।
पोस्ट में भावुक और आक्रामक लहजे में कहा गया है— विधायक जी, जिन किसानों ने आपको वोट नहीं दिया उनके साथ तो आप बुरा करते ही हैं, लेकिन जिन्होंने अपना अमूल्य मत देकर जिताया, उनका भी शोषण करवा रहे हैं? इतनी पैसे की भूख अच्छी नहीं है, जनता को मूर्ख न समझें।”
इस पूरे मामले में एक कड़वा सच यह भी सामने आया है कि किसान खरीदी केंद्रों की अनियमितताओं से परेशान तो हैं और कमेंट्स में अपना दर्द बयां कर रहे हैं, लेकिन कोई भी किसान लिखित शिकायत दर्ज कराने आगे नहीं आ रहा है। इसके पीछे प्रशासनिक तंत्र का खौफ या फसल रिजेक्ट होने का डर भी हो सकता है। लेकिन जब तक लिखित शिकायत नहीं होगी, तब तक भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों के हौसले ऐसे ही बुलंद रहेंगे।
अब देखना यह होगा कि इस सोशल मीडिया विस्फोट के बाद क्या जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इन खरीदी केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर कार्रवाई करते हैं, या अन्नदाता यूं ही लुटता रहेगा।
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़
*वेबसाइट: majholidarpan.com




