सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मझौली में गर्भवती महिलाओं के संदिग्ध रेफरल और दंत चिकित्सा (डेंटल इम्प्लांट) के नाम पर सामने आ रही वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर जबलपुर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
मझौली/जबलपुर
CMHO कार्यालय द्वारा पत्र क्रमांक /सू.अधि./2026/955-9 एवं 9560 जारी कर दोनों प्रथम अपीलों की औपचारिक सुनवाई नियत की गई है। इस बाबत BMO मझौली को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना प्रतिवाद (जवाब) प्रस्तुत करें और अब तक की गई कार्यवाही की रिपोर्ट सौंपें।
1. गर्भवती महिलाओं का रेफरल खेल: प्रसव सेवाओं और बजट पर उठे सवाल
आवेदक शिवम साहू (निवासी- वार्ड नं. 10, मझौली) द्वारा प्रस्तुत RTI आवेदन में खुलासा हुआ है कि CHC मझौली से गर्भवती महिलाओं को शासकीय मेडिकल कॉलेज जबलपुर एवं एल्गिन अस्पताल रेफर किए जाने के मामलों में व्यापक अनियमतिताएं हो सकती हैं।
* लापरवाही का दायरा: अप्रैल 2024 से अब तक रेफर की गई सभी महिलाओं का ब्यौरा और हर केस में डॉक्टरी कारण (Justification) मांगा गया था।
* संसाधनों की स्थिति: CHC मझौली में उपलब्ध सामान्य प्रसव (Normal Delivery) सुविधाओं, ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों/स्टाफ की उपस्थिति तथा वित्तीय वर्ष 2023-24 व 2024-25 के दौरान प्राप्त प्रसव बजट एवं व्यय का पूर्ण लेखा-जोखा मांगा गया है।
* RTI में टालमटोल: तय 30 दिनों की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी संतोषजनक जानकारी न मिलने पर आवेदक ने धारा 19(1) के तहत CMHO के समक्ष प्रथम अपील दायर की।
2. डेंटल विभाग में गायब रिकॉर्ड और निजी क्लीनिकों का सिंडिकेट?
द्वितीय अपील मामला CHC मझौली में वर्ष 2020 से 2025 तक दी गई दंत चिकित्सा सेवाओं और ‘डेंटल इम्प्लांट’ से जुड़ा है।
* 3 साल का डेटा गायब: लोक सूचना अधिकारी ने 26 फरवरी 2026 के अपने जवाब में केवल 2023 के बाद का अपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध कराया, जबकि 2020 से 2022 का पूरा ब्यौरा ही गायब कर दिया गया।
* निजी क्लीनिकों का गठजोड़: आरोप है कि अस्पताल में आवश्यक संसाधन उपलब्ध न होने के बावजूद मरीजों को निजी दंत क्लीनिकों में भेजा जा रहा था, जिसका न तो कोई रेफरल रजिस्टर संधारित है और न ही कोई आधिकारिक आदेश।
* बजट का गणित: 2023 से कोई शासकीय अनुदान न मिलने के दावे के बावजूद दंत उपचार किन संसाधनों से हुए, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। ओपीडी रजिस्टर और उपस्थिति पंजी की प्रमाणित प्रतियां भी दबा ली गईं।
CMHO कोर्ट में सुनवाई और दंडात्मक कार्यवाही की चेतावनी
इस पूरे मामले में CMHO जबलपुर ने BMO (मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी) मझौली को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे पूरे रिकॉर्ड के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित हों।
अपीलार्थी का रुख:
“यदि CMHO कोर्ट से भी निष्पक्ष जांच और प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते, तो यह मामला धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्यवाही हेतु राज्य सूचना आयोग, भोपाल के समक्ष ले जाया जाएगा।”
शासकीय संसाधनों के दुरुपयोग, प्रसूति सेवाओं में लापरवाही और RTI अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ी इस खबर पर संपूर्ण क्षेत्रवासियों और स्वास्थ्य विभाग की नजरें टिकी हुई हैं।




