तहसील को ‘दलाल मुक्त’ करने और व्यवस्था सुधारने अधिवक्ता संघ ने खोला मोर्चा; कॉल लिस्ट चस्पा करने, पटवारियों की मनमानी पर रोक और 7 दिन में आदेश अमल की मांग

मझौली तहसील न्यायालय में लचर प्रशासनिक व्यवस्था, पक्षकारों की परेशानी और परिसर में दिनों-दिन हावी होते बिचौलियों के नेटवर्क के खिलाफ स्थानीय वकीलों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

मझौली/ जबलपुर 

तहसील अधिवक्ता संघ, मझौली ने न्यायालयीन गरिमा को बहाल करने, कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लाने और परिसर को दलाल-मुक्त बनाने की मांग को लेकर जबलपुर कलेक्टर को एक कड़ा स्मरण पत्र सौंपा है। वकीलों ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि राजस्व न्यायालय की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो अधिवक्ता चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।
न्यायालयीन गरिमा पर सवाल: हावी हैं अनाधिकृत लोग
अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन के जरिए खुलासा किया कि तहसील न्यायालय परिसर में अनाधिकृत व्यक्तियों और दलालों का अनावश्यक दखल चरम पर है। स्थिति यह है कि वास्तविक पक्षकारों और उनके अधिकृत अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन हो रहा है। संघ ने मांग उठाई है कि न्यायालयीन सुनवाई के दौरान केवल मूल पक्षकार और उनके अधिकृत वकीलों को ही उपस्थित रहने की अनुमति दी जाए। बाहरी तत्वों और बिचौलियों के प्रवेश पर सख्त पाबंदी लगाकर न्यायालय को तत्काल प्रभाव से ‘दलाल-मुक्त’ घोषित किया जाए।
प्रमुख 5 सूत्रीय मांगें, जिन पर तत्काल कार्रवाई की दरकार:
* समय-सीमा तय हो, अधिवक्ताओं के केस अलग सुने जाएं:
तहसील न्यायालय में वकीलों के मुकदमों और आम पक्षकारों के मामलों को अलग-अलग सूचीबद्ध किया जाए। सुनवाई का एक निश्चित समय निर्धारित हो, ताकि मझौली के अधिवक्ता सिहोरा सिविल कोर्ट सहित अन्य न्यायालयों में भी समय पर पहुंचकर अपने मुकदमों की पैरवी कर सकें।
* कॉल लिस्ट चस्पा करना अनिवार्य किया जाए:
दैनिक पेशी और मुकदमों की क्रमबद्ध जानकारी के लिए न्यायालय कक्ष के बाहर कॉल लिस्ट अनिवार्य रूप से चस्पा की जाए, जिससे आम जनता और वकीलों को प्रकरण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए परेशान न होना पड़े।
* पटवारियों की मनमानी और सीधी पैरवी पर लगे अंकुश:
राजस्व निरीक्षक (RI) और पटवारियों से जुड़े प्रकरणों व उनके कार्यों के लिए सप्ताह में कम से कम दो कार्यदिवस तय किए जाएं और इसकी समय-सारणी सार्वजनिक हो। सबसे अहम बात यह कि पटवारियों द्वारा सीधे प्रकरणों में पैरवी करने और मनमाने तरीके से आदेश पारित कराने की गैर-कानूनी परिपाटी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
* पारित आदेशों पर 7 दिन में हो अमल:
न्यायालय से आदेश जारी होते ही उसकी प्रमाणित प्रति संबंधित रीडर, राजस्व निरीक्षक या पटवारी को तत्काल उपलब्ध कराई जाए। आदेश की ऑनलाइन पोर्टल पर फीडिंग और अभिलेखीय (रिकॉर्ड) अमल अधिकतम 7 कार्यदिवसों के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा हो। अनावश्यक विलंब करने वाले लापरवाह कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
* दलालों का पूरी तरह सफाया हो:
न्यायालय परिसर के भीतर केवल अधिकृत अधिवक्ताओं व पक्षकारों को ही पैरवी का अधिकार हो। बिचौलियों की अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगाने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
सुधार नहीं हुआ तो होगा आंदोलन
अधिवक्ताओं का कहना है कि राजस्व न्यायालयों में पारदर्शिता के अभाव का सीधा खामियाजा ग्रामीण और गरीब किसानों को भुगतना पड़ता है। छोटे-छोटे नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन के मामलों में आदेश होने के महीनों बाद भी अमल नहीं होता।
ज्ञापन सौंपने के दौरान तहसील अधिवक्ता संघ मझौली के पदाधिकारियों सहित सिविल कोर्ट सिहोरा के वरिष्ठ अधिवक्तागण मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि यह स्मरण पत्र प्रशासन को अंतिम सचेत करने का प्रयास है, यदि शीघ्र ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो संपूर्ण तहसील परिसर में कामकाज ठप कर व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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