सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: “राशन और खाद के लिए अंगूठा अनिवार्य, तो वोटिंग में बायोमेट्रिक क्यों नहीं?”

 भारत में चुनावी पारदर्शिता को लेकर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है

नई दिल्ली

। कोर्ट ने तकनीक के दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब आम नागरिक को मूलभूत सुविधाओं के लिए अपनी पहचान बायोमेट्रिक के जरिए साबित करनी पड़ती है, तो लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव ‘मतदान’ में इसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा?

न्यायालय में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने राशन, पेंशन और खाद जैसी सरकारी योजनाओं का उदाहरण दिया। कोर्ट ने कहा:”यदि फर्जीवाड़े को रोकने के लिए जन वितरण प्रणाली (PDS) और बैंकिंग में फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य हो सकता है, तो मतदान केंद्रों पर फर्जी वोटिंग और डुप्लीकेट वोटर्स को रोकने के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल करने में क्या बाधा है?”

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि वर्तमान में वोटर आईडी कार्ड और मैनुअल मिलान के आधार पर मतदान होता है, जिसमें गड़बड़ी और ‘छद्म मतदान’ (Proxy Voting) की गुंजाइश बनी रहती है। यदि मतदान के समय फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन (Iris Scan) को आधार डेटा से जोड़कर अनिवार्य किया जाए, तो:

1. फर्जी वोटिंग: एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग जगहों पर वोट डालना असंभव हो जाएगा।

2. पारदर्शिता:चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और अधिक बढ़ेगी।

3. सटीक डेटा:मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम पर पड़ने वाले अवैध वोटों पर रोक लगेगी।

हालांकि कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र और आयोग से जवाब मांगा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लागू करना इतना आसान नहीं होगा। इसके सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं:

डेटा सुरक्षा: करोड़ों मतदाताओं के बायोमेट्रिक डेटा की गोपनीयता बनाए रखना।

तकनीकी ढांचा: देश के दूर-दराज के इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट और बायोमेट्रिक मशीनों की उपलब्धता।

समय और लागत: पूरे देश में इस सिस्टम को स्थापित करने के लिए भारी बजट और कानूनी संशोधनों की आवश्यकता होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह चुनावी निष्पक्षता को लेकर गंभीर है। अब केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को यह बताना होगा कि क्या वे भविष्य के चुनावों में बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य बनाने की योजना बना रहे हैं या इसमें क्या संवैधानिक और तकनीकी अड़चनें हैं। मामले की अगली सुनवाई के बाद ही चुनावी भविष्य की यह नई तस्वीर साफ हो पाएगी

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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