पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को लेकर प्रदेश में राजनीति गरमा गई है
प्रदेश डेस्क
। एक तरफ कई पेट्रोल पंपों पर ‘पेट्रोल नहीं है’ के बोर्ड लटके नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष और प्रशासन ने इसे विपक्ष का रचित ‘सुनियोजित षड़यंत्र’ करार दिया है।
ईंधन की किल्लत की खबरों के बीच जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन का दावा है कि डिपो में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा नहीं है। अधिकारियों के अनुसार:
प्रदेश में कहीं भी पेट्रोल या डीजल की वास्तविक कमी नहीं है।
पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लगवाना जनता के बीच पैनिक (अफरा-तफरी) पैदा करने की कोशिश है।
अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर नजर रखी जा रही है।
विपक्ष पर सीधा हमला: कांग्रेस, सपा और वामपंथी निशाने पर
इस पूरे घटनाक्रम को सत्तारूढ़ खेमे ने राजनीतिक चश्मे से देखा है। आरोप लगाया जा रहा है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दल मिलकर सरकार की छवि खराब करने के लिए षड़यंत्र रच रहे हैं
1. भ्रम की राजनीति: विपक्षी दलों पर आरोप है कि वे पेट्रोल पंप संचालकों के साथ मिलकर कृत्रिम किल्लत पैदा कर रहे हैं।
2. अफवाह का बाजार:सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर यह संदेश फैलाया जा रहा है कि ईंधन खत्म होने वाला है, ताकि आम जनता परेशान हो और सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़े।
3. अर्थव्यवस्था को चोट: इस तरह के दुष्प्रचार से न केवल जनता में डर पैदा होता है, बल्कि परिवहन और दैनिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा ईंधन का भंडारण न करें। प्रशासन का कहना है कि आपूर्ति सामान्य है और सभी पंपों को पर्याप्त तेल भेजा जा रहा है।
विपक्ष हताशा में अब जनता को डराने की राजनीति कर रहा है। पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, यह सिर्फ भ्रम फैलाने का एक असफल प्रयास है।” — प्रशासनिक वक्तव्य




