मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा हाल ही में कोविड-19 के बाद हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) के बढ़ते मामलों पर जताई गई चिंता ने एक नई राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है।
भोपाल/नई दिल्ली:
जहां सरकार इन मौतों को स्वास्थ्य जटिलताओं से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष और नागरिक समूहों ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति और वैक्सीन के संभावित दुष्प्रभावों पर सवाल खड़े करना शुरू कर दिए हैं।
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह मांग जोर पकड़ रही है कि सरकार को वैक्सीन के प्रभावों की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। आलोचकों का तर्क है कि:
जबरिया टीकाकरण:आरोप है कि महामारी के दौरान अप्रत्यक्ष दबाव और अनिवार्यता के कारण लोगों को वैक्सीन लगवानी पड़ी।
युवाओं में बढ़ती मौतें: हाल के महीनों में जिम, खेल के मैदान और कार्यक्रमों में युवाओं की अचानक मौत के वीडियो ने जनता में डर पैदा किया है।
पारदर्शिता की कमी: वैक्सीन कंपनियों के साथ सरकार के समझौतों और “इलेक्टोरल बॉन्ड” के जरिए मिले चंदे को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसे जनता के स्वास्थ्य के साथ समझौते के रूप में देखा जा रहा है।
पीड़ित परिवारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार ने टीकाकरण को बढ़ावा दिया था, तो अब उन परिवारों की सुध लेना भी सरकार का ही दायित्व है जिन्होंने अपने कमाऊ सदस्यों को खोया है।
जब सरकार वैक्सीन के प्रमाण पत्र पर अपनी तस्वीर लगा सकती है, तो इन मौतों की जिम्मेदारी लेने और परिवारों को आर्थिक राहत (मुआवजा) देने से पीछे क्यों हट रही है?” — एक पीड़ित परिजन का सवाल
हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञ अभी भी मौत के सटीक कारणों के लिए विस्तृत डेटा और ‘ऑटोप्सी’ रिपोर्ट की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं, लेकिन जनमानस में वैक्सीन के प्रति अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
प्रमुख मांगें जो उभर कर आ रही हैं:
1. स्वतंत्र जांच: कोविड वैक्सीन के लॉन्ग-टर्म साइड इफेक्ट्स पर एक निष्पक्ष न्यायिक या वैज्ञानिक जांच हो।
2. मुआवजा नीति: ‘सडन डेथ’ (अचानक मौत) का शिकार हुए युवाओं के परिवारों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाए।
3. डेटा का प्रकटीकरण:वैक्सीन कंपनियों द्वारा जमा किए गए क्लिनिकल डेटा और दुष्प्रभावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
मुख्यमंत्री का बयान केवल एक स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि एक बड़े संकट की आहट है। अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है कि वह इन मौतों के कारणों को स्पष्ट करे और प्रभावित परिवारों को न्याय व सहायता सुनिश्चित करे।




