प्रदेश भर में सूरज के तीखे तेवर और भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
मझौली/जबलपुर
जहां एक ओर सरकार और प्रशासन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं मझौली नगर परिषद की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। नगर के मुख्य मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ की व्यवस्था न होने से राहगीर और आम नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
टैक्स देने के बाद भी जनता को नहीं मिल रही मूलभूत सुविधा
नगर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि वे अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा नगर परिषद को टैक्स के रूप में देते हैं। इसके बावजूद, इस भीषण तपिश में उन्हें पीने के लिए ठंडे पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी नसीब नहीं हो रही है। बाजार आने वाले ग्रामीण और राहगीरों को मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर तपती धूप में प्यासा भटकना पड़ रहा है।
नगरीय प्रशासन विभाग के दावों पर सवाल
हाल ही में नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त द्वारा पेयजल व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर की गई सख्त कार्रवाई के बावजूद मझौली नगर परिषद प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि:
बस स्टैंड, मुख्य बाजार और तहसील कार्यालय जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में एक भी शीतल पेयजल केंद्र (प्याऊ) चालू नहीं है।
नगर परिषद द्वारा जनहित के कार्यों में उदासीनता बरती जा रही है।
भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी चाहिए थीं, जो अब तक नदारद हैं।
नगरवासियों ने अब इस मामले में जिला प्रशासन और नगरीय प्रशासन विभाग के उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। जनता का सवाल है कि जब शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है, तो मझौली में इस दिशा में लापरवाही क्यों बरती जा रही है? क्या यहां भी जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरेगी या जनता इसी तरह प्यासी मरती रहेगी?
ब्यूरो रिपोर्ट: मझौली दर्पण न्यूज़




