25 साल, 12 पंचायतें और अनगिनत वादे… सिमरिया-मझगवां मार्ग की बदहाली पर कब जागेगा सिस्टम?

एक तरफ स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इंडिया के ढोल पीटे जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ जबलपुर जिले की मझौली तहसील का सिमरिया-मझगवां मार्ग सिस्टम की नाकामी और घोर उपेक्षा का जीता-जागता सबूत बना हुआ है।

मझौली (जबलपुर)

पिछले चौथाई शतक (25 वर्षों) से इस इलाके के हजारों ग्रामीण एक पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। चुनाव आते ही नेता वोट के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही ग्रामीणों को बदहाल रास्तों के हवाले छोड़ दिया जाता है।

 12 ग्राम पंचायतों के हजारों लोगों की ‘सजा-ए-सफर’

यह सिर्फ दो गांवों के बीच की सड़क नहीं है, बल्कि आसपास की करीब **12 ग्राम पंचायतों** की लाइफलाइन है। रोजाना हजारों किसान, छात्र, बुजुर्ग और नौकरीपेशा लोग इसी गड्ढे, पत्थर और धूल से भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।

25 सालों में कई सरकारें आईं और गईं, प्रशासनिक अधिकारी बदले, लेकिन इस इलाके के ग्रामीणों की बदहाली की तस्वीर नहीं बदली।

 बारिश में नरक जैसी स्थिति: जब एम्बुलेंस भी टेक देती है घुटने

मानसून आते ही इस मार्ग की हालत किसी भयानक सपने जैसी हो जाती है। सड़क की जगह सिर्फ कीचड़ और गहरे गड्ढे नजर आते हैं:

 मरीजों की जान पर आफत: किसी गंभीर मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना एक जंग जीतने जैसा होता है। कई बार कीचड़ के कारण 108 एम्बुलेंस गांव तक पहुंच ही नहीं पाती, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

 बच्चों का भविष्य अधर में: स्कूल जाने वाले नौनिहालों को कीचड़ से सराबोर होकर जाना पड़ता है। कई बार खराब रास्ते की वजह से बच्चे स्कूल जाने से कतराते हैं, जिससे उनकी शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

अब बर्दाश्त नहीं करेंगे’—आंदोलन की राह पर ग्रामीण

शासन और प्रशासन के चक्कर काटकर थक चुके ग्रामीणों के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्होंने हर जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी को आवेदन देकर देख लिया, लेकिन नतीजा सिर्फ शून्य निकला।

ग्रामीणों ने अब साफ़ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सिमरिया से मझगवां मार्ग के निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति और बजट जारी नहीं किया गया, तो वे उग्र जन-आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे।

 सवाल:

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? या फिर 12 पंचायतों के हजारों बेबस नागरिकों की यह जायज मांग फाइलों की धूल में ही दबी रह जाएंगी

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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