तहसील मझौली के ग्राम नन्हवारा (वार्ड नंबर 07) में सेंट्रल बैंक के सामने स्थित बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध प्लाटिंग और शासकीय भूमि पर कब्जा कर उसे बेचने का एक गंभीर मामला गरमाता नजर आ रहा है।
मझौली (जबलपुर)
इस संबंध में स्थानीय निवासी दौलतराम कोरी द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सिहोरा के समक्ष एक शिकायती पत्र सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच और निर्माण कार्यों पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता दौलतराम कोरी का आरोप है कि पटवारी हल्का नंबर 21, ग्राम नन्हवारा में खसरा नंबर 16 (कुल रकबा 0.85 हेक्टेयर) के एक बड़े हिस्से पर, जो कि शासकीय अभिलेखों के दायरे में आता है, डॉ. सुनील सोनी नामक व्यक्ति द्वारा अवैध रूप से प्लाट काटकर बेचे जा रहे हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन लोगों को ये प्लाट बेचे गए हैं, वे अब वहां धड़ल्ले से पक्के भवनों का निर्माण करा रहे हैं। विरोध करने पर कथित तौर पर गुंडागर्दी और डराने-धमकाने का सहारा लिया जा रहा है।
दस्तावेजों में डायवर्जन का पेच
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी सिहोरा द्वारा वर्ष 2015 (आदेश दिनांक 03/06/2015) में आवेदिका श्रीमती मंजूलता पति सुनील कुमार सोनी (निवासी वार्ड नं. 03, मझौली) के पक्ष में इसी क्षेत्र की भूमि खसरा नंबर 16/2 (रकबा 0.336 हेक्टेयर / 36,154 वर्गफुट)** का कृषि से आवासीय प्रयोजन हेतु व्यवपवर्तन (डायवर्जन) स्वीकृत किया गया था।
म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 59 के तहत जारी इस आदेश में साफ तौर पर 13 कड़ी शर्तें लगाई गई थीं, जिनमें प्रमुख थीं:
* आवेदक मौके पर **कोई अवैध कॉलोनी का निर्माण नहीं करेगा**।
* निर्माण से पूर्व स्थानीय नगर परिषद से नक्शा व निर्माण अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
* यदि भविष्य में प्रस्तुत दस्तावेज कूट रचित या फर्जी पाए जाते हैं, तो डायवर्जन आदेश स्वतः निरस्त माना जाएगा।
सीमांकन और पुलिस बल की मौजूदगी
अभिलेखों से यह भी स्पष्ट होता है कि वर्ष 2012 (राजस्व प्रकरण क्रमांक 16/A12/2011-12) में तत्कालीन तहसीलदार मझौली के आदेश पर राजस्व निरीक्षक और पटवारी रूपचंद पटेल द्वारा पुलिस बल की मौजूदगी में इस भूमि का सीमांकन (बटांकन) कर निशान लगवाए गए थे।
शिकायतकर्ता की मांग: पुनः जांच और निर्माण पर लगे रोक
वर्तमान में एसडीएम सिहोरा को सौंपे गए पत्र में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि डायवर्जन की आड़ में मूल खसरा नंबर 16 की शासकीय भूमि को भी प्रभावित किया जा रहा है। पत्र में मांग की गई है कि:
1. इस पूरे खसरा नंबर की पुनः निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
2. शासकीय भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाए।
3. वर्तमान में चल रहे सभी अवैध निर्माण कार्यों पर **तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध** लगाया जाए।
अधिकारियों का रुख:
एसडीएम कार्यालय सिहोरा में शिकायत दर्ज होने के बाद अब यह देखना लाजिमी होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है। क्या वाकई डायवर्जन की आड़ में शासकीय भूमि की अवैध प्लाटिंग की जा रही है, या यह आपसी रंजिश का मामला है? यह तो राजस्व विभाग की पैमाइश और बारीकी से की गई जांच के बाद ही साफ हो पाएगा




