जबलपुर में बड़ा खुलासा: बिना फायर NOC और बिना स्वीकृत नक्शे के चल रहा ‘स्वास्तिक अस्पताल’, मरीजों की जिंदगी दांव पर!

संस्कारधानी जबलपुर में मरीजों की जान से खिलवाड़ का एक और बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है

जबलपुर

 दीनदयाल चौक (ITI रोड) स्थित स्वास्तिक मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल को लेकर आरटीआई और शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, उसने स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोप है कि यह अस्पताल न सिर्फ नगर निगम से बिना नक्शा पास कराए अवैध रूप से खड़ा कर दिया गया, बल्कि इसके पास आग से सुरक्षा से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज यानी फायर एनओसी (Fire NOC) भी नहीं है।

जबलपुर अस्पताल अग्निकांड से भी नहीं लिया सबक?

जबलपुर पहले भी निजी अस्पतालों की घोर लापरवाही का दंश झेल चुका है, जहां न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में लगी भीषण आग के कारण कई मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। उस दर्दनाक हादसे के बाद भी ‘स्वास्तिक अस्पताल’ प्रबंधन की यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसी है। बिना फायर एनओसी के इतने बड़े मल्टीस्पेशलिटी और आईसीयू (ICU) युक्त अस्पताल का संचालन सीधे तौर पर मरीजों और वहां काम करने वाले स्टाफ की जिंदगी को दांव पर लगाना है।

जांच के दायरे में आए ये गंभीर मुद्दे:

 अवैध निर्माण का साया:बिना स्वीकृत मानचित्र (नक्शा) के अस्पताल जैसी संवेदनशील व्यावसायिक इमारत का निर्माण कैसे हो गया और सालों से यह प्रशासन की नजरों से कैसे बचा रहा, यह बड़ा सवाल है।

 फायर सेफ्टी मानकों की धज्जियां: अस्पताल में आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम और आपातकालीन निकास (Emergency Exit) नियमों के मुताबिक नहीं पाए गए हैं।

 अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल:बिना अनिवार्य एनओसी और वैध दस्तावेजों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय से इस अस्पताल को संचालन की अनुमति (रजिस्ट्रेशन) कैसे और किन परिस्थितियों में मिलती रही, इसकी जांच भी अब मांग के दायरे में है।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों द्वारा अस्पताल को तत्काल सील करने और प्रबंधन पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर चल रहे ऐसे अस्पतालों के खिलाफ नगर निगम और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से तत्काल ‘बुलडोजर’ और ‘सीलिंग’ की दंडात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।

यदि वक्त रहते स्वास्थ्य विभाग नींद से नहीं जागा, तो किसी भी दिन यहां बड़ा हादसा घटित हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों की होगी।

जबलपुर में अस्पतालों की लापरवाही पहले भी जानलेवा साबित हो चुकी है, जैसा कि आप इस जबलपुर अस्पताल अग्निकांड समाचार वीडियो में देख सकते हैं जहाँ सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण एक निजी अस्पताल में भीषण आग लग गई थी और कई लोगों की मौत हो गई थी

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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