खाद संकट से हाहाकार: मझौली में रात 1 बजे से कतार में लगने को मजबूर ‘अन्नदाता’, कालाबाजारी के आरोप

मझौली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बोआई व सिंचाई के ऐन वक्त पर यूरिया और एनपीके खाद की भीषण किल्लत ने विकराल रूप धारण कर लिया है।

मझौली/ जबलपुर 

जिस अन्नदाता को इस समय अपने खेतों में फसलों की देखभाल और सिंचाई में होना चाहिए था, वह खाद की एक-एक बोरी के लिए सहकारी सोसाइटियों के बाहर हाड़ कंपा देने वाली ठंड और खुले आसमान के नीचे पूरी-पूरी रात बिताने को मजबूर है।

रातभर पहरा, सुबह मिलता है ‘ठन-ठन गोपाल

मझौली स्थित वितरण केंद्रों और सहकारी समितियों के बाहर हालात बेकाबू हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे किसान आधी रात 1 बजे से ही अपनी बारी के इंतजार में कतारों में डट जाते हैं।  और खुले आसमान के नीचे घंटों मशक्कत करने के बाद जब सुबह सोसाइटियों के ताले खुलते हैं, तो कर्मचारियों का एक ही रटा-रटाया जवाब मिलता है— “टोकन खत्म हो गए हैं, कल आना।”

किसान का छलका दर्द: “खेत संभालें या रातें काली करें?”

बनखेड़ी गांव से खाद की आस में पहुंचे पीड़ित किसान अमितेश्वर सिंह राजपूत ने अव्यवस्था और प्रशासनिक कुप्रबंधन पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए अपना दर्द साझा किया:

“हम बनखेड़ी से आकर रात 1 बजे से ही इस लाइन में खड़े हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी हमें खाली हाथ लौटाया जा रहा है। खेतों में खड़ी फसलें खाद न मिलने के कारण पीली पड़ रही हैं और सूखने की कगार पर हैं। एक तरफ फसल बर्बाद होने का खतरा है और दूसरी तरफ परिवार चलाने की चिंता; समझ नहीं आता कि हम खेतों में काम करें या सोसाइटियों के बाहर अपनी रातें काली करें।”

प्रशासनिक दावे कागजी, धरातल पर कालाबाजारी चरम पर

केवल बनखेड़ी ही नहीं, बल्कि अमगवा दिवरी, उमरिया ढिरहा और आसपास के दर्जनों गांवों से आए किसानों का भी यही हाल है। किसान अमितेश्वर सिंह राजपूत और स्थानीय जनसंगठनों का सीधा आरोप है कि कृषि विभाग और जिला प्रशासन द्वारा खाद की पर्याप्त उपलब्धता के जो लंबे-चौड़े दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह हवा-हवाई और कागजी साबित हो रहे हैं।

धरातल पर आलम यह है कि एक ओर जहां आम किसान सरकारी केंद्रों पर दर-दर भटकने को मजबूर है, वहीं दूसरी ओर बिचौलियों और मुनाफाखोरों की साठगांठ से खाद की अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी धड़ल्ले से जारी है। खुले बाजार में यही खाद किसानों को मनमाने दामों पर बेची जा रही है।

आक्रोशित किसानों ने रखीं 3 मुख्य मांगें

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के किसानों और किसान संगठनों ने एकजुट होकर प्रशासन से तत्काल राहत प्रदान करने हेतु प्रमुख मांगें रखी हैं:

 * पारदर्शी टोकन व वितरण व्यवस्था: खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि दूर-दराज से आने वाले किसानों को उनका हक मिल सके और टोकन वितरण में धांधली रुके।

 * काउंटरों और केंद्रों का विस्तार: सोसाइटियों पर उमड़ रही भारी भीड़ को देखते हुए तत्काल अतिरिक्त काउंटर शुरू किए जाएं और नए वितरण केंद्र खोले जाएं।

 * खाद माफिया पर नकेल: अवैध जमाखोरी करने वाले बिचौलियों और मनमाने दामों पर ब्लैक में खाद बेचने वाले दुकानदारों पर तत्काल छापेमारी कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी

समय पर यूरिया और एनपीके न मिलने से मझौली क्षेत्र के हजारों किसानों की महीनों की गाढ़ी कमाई और मेहनत पानी में मिलती नजर आ रही है। आक्रोशित किसानों और क्षेत्रीय ग्रामीण नेताओं ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर खाद की सुचारू आपूर्ति और पारदर्शी वितरण प्रणाली शुरू नहीं की गई, तो क्षेत्र के किसान सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे।

किसान नेताओं का साफ कहना है कि यदि खाद न मिलने के कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, तो इसकी पूरी और सीधी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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