तीन ग्राम पंचायतों में औचक निरीक्षण: निर्माण की गुणवत्ता और समय-सीमा पर जोर, अफसरों को दो टूक—’लापरवाही बर्दाश्त नहीं’
कटनी/ढीमरखेड़ा:
ग्रामीण अंचलों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर के कड़े निर्देशों के अनुपालन में जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) युजवेंद्र कोरी ने क्षेत्र की तीन ग्राम पंचायतों का सघन दौरा किया। उन्होंने एसी कमरों की समीक्षा बैठकों से बाहर निकलकर सीधे निर्माण स्थलों पर पहुंचकर ईंट, गारे और तकनीकी मानकों की बारीकी से जांच की।
तीन पंचायतों में विभिन्न परियोजनाओं की पड़ताल
जनपद सीईओ ने बिना पूर्व सूचना के पंचायतों का रुख किया, जिससे निर्माण एजेंसियों और मातहत अमले में हड़कंप की स्थिति रही। उन्होंने कार्यस्थल पर मौजूद तकनीकी ड्राइंग और एस्टीमेट के आधार पर कार्यों का मिलान किया:
* भटगवां में नल-जल योजना व पंचायत भवन: ग्रामीणों की प्यास बुझाने से जुड़ी ‘हर घर नल-जल योजना’ की पाइपलाइन बिछाने व जलापूर्ति कार्यों की प्रगति जांची। साथ ही निर्माणाधीन ग्राम पंचायत भवन की मजबूती व ले-आउट का निरीक्षण किया।
* पिपरिया सहलावन में सामुदायिक भवन: सार्वजनिक आयोजनों के लिए बन रहे सामुदायिक भवन के ढांचे और प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण किया। उपयंत्रियों को तकनीकी मापदंडों में रत्ती भर भी ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए।
* टोला भरभरा में स्वच्छता परिसर (CSC): स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत बन रहे सामुदायिक स्वच्छता परिसर के कार्यों की गति तेज करने को कहा, ताकि ग्रामीणों को जल्द ही इस सुविधा का लाभ मिल सके।
गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं, कागजी प्रगति पर लगेगी लगाम
निरीक्षण के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल या गैर-जरूरी लेटलतीफी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने फील्ड स्टाफ को चेतावनी दी कि यदि समय-सीमा के भीतर काम पूरा नहीं हुआ या गुणवत्ता में खामी पाई गई, तो संबंधित उपयंत्रियों, पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों पर सीधी जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
फील्ड मॉनिटरिंग से योजनाओं को मिली रफ्तार




