तलाड में विकास के दावों की खुली पोल: श्मशान घाट बदहाल, अंतिम संस्कार के लिए भी जूझ रहे ग्रामीण

वारिस और चिलचिलाती धूप में छाता तानकर मुखाग्नि देने की मजबूरी

 * पेयजल और पहुंच मार्ग नदारद, बाउंड्रीवॉल न होने से मवेशियों का डेरा; अजय यादव समेत ग्रामीणों में गहरा आक्रोश

तलाड/मझौली (विशेष प्रतिनिधि)।

जनपद पंचायत मझौली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत तलाड में सरकारी योजनाओं और कागजी दावों की जमीनी हकीकत श्मशान भूमि पर दम तोड़ती दिख रही है। जीवन की अंतिम यात्रा जहां गरिमा और शांति की हकदार होती है, वहीं तलाड के श्मशान घाट पर बुनियादी सुविधाओं के घोर अभाव के चलते शोक संतप्त परिजनों को दोहरे संताप से गुजरना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि श्मशान घाट की भूमि पर अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है और जिम्मेदार नुमाइंदे पूरी तरह बेपरवाह बने हुए हैं।

मौसम की मार और बेबसी का मंजर

ग्रामीण अजय यादव एवं अन्य ग्रामीणों के अनुसार, श्मशान भूमि पर अंतिम संस्कार के लिए न तो पक्का चबूतरा बनाया गया है और न ही ऊपर टीन शेड का कोई प्रबंध है। सबसे विकट स्थिति बारिश के मौसम में बनती है, जब किसी का निधन होने पर खुले आसमान के नीचे गीली लकड़ियों के बीच चिता सजाना किसी जंग जीतने जैसा हो जाता है। लोग तिरपाल और छाता तानकर अंतिम क्रिया पूरी करने को विवश होते हैं। वहीं, भीषण गर्मी में कड़ी धूप से बचने के लिए भी वहां दूर-दूर तक कोई छायादार स्थान या विश्राम शेड उपलब्ध नहीं है।

गंदगी, आवारा मवेशी और पानी का संकट

सुविधाविहीन श्मशान भूमि पर सुरक्षा के लिए कोई बाउंड्रीवॉल तक नहीं बनाई गई है, जिसके चलते वहां दिनभर आवारा मवेशियों का जमावड़ा रहता है। चारों ओर फैली कटीली झाड़ियां और गंदगी यह साबित करने के लिए काफी हैं कि पंचायत स्तर पर यहां कभी सफाई या रखरखाव की सुध नहीं ली गई। अंतिम संस्कार के बाद शुद्धिकरण व हाथ-पैर धोने के लिए न तो कोई हैंडपंप चालू हालत में है और न ही पानी की कोई टंकी मौजूद है। परिजनों को दूर-दराज से बर्तनों में पानी ढोकर लाना पड़ता है।

कागजों में सिमटा ‘मुक्तिधाम योजना’ का बजट?

शासन द्वारा ग्रामीण अंचलों में ‘शांति धाम’ और ‘मुक्तिधाम’ निर्माण के लिए लाखों रुपयों का बजट जारी करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन ग्राम पंचायत तलाड में यह राशि कहां खप गई, यह एक बड़ा जांच का विषय है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि ग्राम सभा की बैठकों से लेकर पंचायत प्रतिनिधियों के समक्ष कई मर्तबा इस गंभीर समस्या को रखा गया, लेकिन हर बार केवल खोखले आश्वासन ही हाथ लगे।

जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

स्थानीय ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ शासन स्तर पर अंतिम संस्कार सहायता और विकास के बड़े-बड़े दावे होते हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर तक उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। ग्रामीणों ने जनपद पंचायत सीईओ और जिला प्रशासन से मांग की है कि तडार श्मशान भूमि का अविलंब स्थलीय निरीक्षण किया जाए, निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत मद की निष्पक्ष जांच हो और प्राथमिकता के आधार पर टीन शेड, चबूतरा, बाउंड्रीवॉल व पेयजल बोर का निर्माण कराया जाए।

ग्रामीणों की दो टूक:

 “किसी अपने को खोने का दुख सबसे बड़ा होता है, लेकिन यहां श्मशान घाट की दुर्दशा देखकर दुख गुस्से में बदल जाता है। बारिश में अंतिम विदाई देना नर्क जैसा लगता है। अगर पंचायत जल्द सुध नहीं लेती, तो ग्रामीण जनपद स्तर पर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।”

 — अजय यादव शरद परिहार एवं आक्रोशित ग्रामीण, ग्राम पंचायत तडार

इन बिंदुओं पर सीधे जवाबदेही तय हो:

 * श्मशान भूमि पर मुक्तिधाम योजना के तहत अब तक कौन-कौन से निर्माण कार्य स्वीकृत हुए और उनकी राशि कहां खर्च हुई?

 * पक्के शेड और चबूतरे के बिना वर्षों से खुले में अंतिम संस्कार कराने का जिम्मेदार कौन है?

 * पेयजल, बाउंड्रीवॉल और पहुंच मार्ग की फाइलें किन दफ्तरों में धूल फांक रही हैं?

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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