मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सरकारी खजाने में बड़ी सेंध लगाने की कोशिश को मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन की सक्रियता ने विफल कर दिया है।
भोपाल
पुराने बारदाने (Gunny Bags) की खरीदी के लिए जारी किए गए एक टेंडर में अधिकारियों की सांठगांठ से किए जा रहे करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।
प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए पुराने बारदानों की आवश्यकता थी। विभागीय अधिकारियों ने कथित तौर पर टेंडर को “मैनेज” कर **₹54.20 प्रति बोरा** की दर तय कर दी थी। जबकि बाजार में इन पुराने बोरों की वास्तविक कीमत काफी कम थी।
इस धांधली की सूचना जब मुख्य सचिव अनुराग जैन को व्यक्तिगत रूप से दी गई और उन्हें अवगत कराया गया कि ₹35 के बोरे को दोगुने से अधिक दाम पर खरीदा जा रहा है, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सख्त कदम उठाए:
टेंडर निरस्त: मुख्य सचिव ने पूर्व में स्वीकृत विवादित टेंडर को तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया।
नया टेंडर: पारदर्शिता बरतते हुए दोबारा टेंडर आमंत्रित किए गए।
बड़ी बचत: नए टेंडर में वही बारदाने ₹37.20 प्रति बोरा की दर पर प्राप्त हुए।
पहली और दूसरी निविदा की दरों में करीब ₹17 प्रति बोरा का अंतर आया। करोड़ों की संख्या में होने वाली इस खरीदी के गणित को देखें, तो इस एक फैसले से प्रदेश के सरकारी खजाने के 80 करोड़ रुपए लुटने से बच गए।
“यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि जनता की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा का विषय है। मुख्य सचिव जी को धन्यवाद पत्र लिखकर अब उन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है जिन्होंने इस घोटाले की रूपरेखा तैयार की थी।
जहाँ एक ओर मुख्य सचिव की इस कार्यप्रणाली की प्रशंसा हो रही है, वहीं दूसरी ओर सवाल उन अधिकारियों पर उठ रहे हैं जिन्होंने ₹54.20 की दर को मंजूरी दी थी। मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अनुरोध किया गया है कि भ्रष्टाचार की नीयत रखने वाले इन अधिकारियों को चिन्हित कर कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के ‘मैनेज्ड टेंडर’ के खेल पर लगाम लग सके।




