कचरे और जलकुंभी से पटा ऐतिहासिक सरोवर, जर्जर घाट दे रहे हादसों को न्योता; उपेक्षा से श्रद्धालुओं में पनपा गहरा आक्रोश


मझौली (जबलपुर)
ऐतिहासिक वैभव और पौराणिक आस्था का केंद्र मझौली नगर इन दिनों प्रशासनिक अनदेखी के गहरे भंवर में फंसा हुआ है। भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भगवान श्री वराह की पावन धरा पर स्थित सदियों पुराना ऐतिहासिक ‘नरीला तालाब’ बदहाली के आंसू बहा रहा है।
आस्था, इतिहास और पर्यावरण के इस त्रिवेणी संगम पर अब अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। सरोवर की दुर्दशा देख स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं का धैर्य जवाब दे गया है। नगरवासियों ने शासन-प्रशासन से इस पवित्र धरोहर के समग्र कायाकल्प और सौंदर्यीकरण की पुरजोर मांग उठाई है।
आस्था का केंद्र अब कचरे का डंपिंग यार्ड
मझौली स्थित भगवान वराह का मंदिर देश के चुनिंदा और अद्वितीय पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है। मंदिर से सटा नरीला तालाब सदियों से धार्मिक अनुष्ठानों, पर्व-त्योहारों पर पवित्र स्नान और दीपदान का मुख्य केंद्र रहा है। नगर परिषद और जिम्मेदार विभागों की बेरुखी से आज यह पावन सरोवर बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है:
* जलकुंभी का जाल, सड़ांध मारता पानी: तालाब के तीन-चौथाई हिस्से पर हरी जलकुंभी और गाद का कब्जा है। जलीय जीवन संकट में है और स्वच्छ जल अब बदबूदार दलदल में तब्दील हो चुका है।
* मौत को दावत देते जर्जर घाट: कभी श्रद्धालुओं की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले पक्के घाट अब टूट-फूट कर ढहने की कगार पर हैं। फिसलन और नुकीले पत्थरों के कारण पर्वों पर महिलाओं और बुजुर्गों का स्नान करना जान जोखिम में डालने जैसा है।
* भू-माफिया और अतिक्रमण की नजर: स्पष्ट सीमांकन और फेंसिंग न होने के चलते जलाशय के कैचमेंट एरिया में धीरे-धीरे अवैध कब्जे पैर पसार रहे हैं।
पर्यटन का सिरमौर बनने की क्षमता, पर अफसरशाही उदासीन
मझौली का वराह मंदिर भारतीय वास्तुकला और मूर्तिकला का बेजोड़ नमूना है, जिसे देखने प्रदेश और देश के कोने-कोने से सैलानी आते हैं। जानकारों का मानना है कि यदि नरीला तालाब का गहरीकरण कर इसके चारों तरफ सुंदर पाथवे, हेरिटेज पोल लाइटिंग, म्यूजिकल फाउंटेन और सिटिंग अरेंजमेंट विकसित किया जाए, तो यह पूरा क्षेत्र एक भव्य धार्मिक-पर्यटन कॉरिडोर बन सकता है। इससे नगर का भू-जल स्तर रिचार्ज होगा और स्थानीय युवाओं को गाइड, खान-पान व परिवहन से जुड़े रोजगार मिलेंगे।
नागरिकों की सीधी मांग: कागजी फाइलें छोड़ धरातल पर उतरे काम
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और युवा संगठनों ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए चार सूत्रीय मांगें रखी हैं:
* सघन सफाई व गहरीकरण: तालाब से जलकुंभी और सिल्ट की तत्काल निकासी कर वैज्ञानिक पद्धति से गहरीकरण कराया जाए।
* आधुनिक घाट व सुरक्षा: चारों ओर पक्के सुसज्जित घाट, मजबूत रेलिंग और उच्च-क्षमता वाली लाइटें लगाई जाएं।
* गंदे पानी की रोकथाम: नगर से आने वाले गंदे नालों का रुख मोड़ा जाए या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित हो।
* हरित गलियारा: तालाब के तट पर औषधीय पौधों की वाटिका और वॉकिंग ट्रैक तैयार किया जाए। “यह केवल एक जलाशय नहीं, हमारी सांस्कृतिक अस्मिता और पूर्वजों की अमानत है। यदि प्रशासन ने जल्द विशेष बजट मंजूर कर धरातल पर काम शुरू नहीं किया, तो नगरवासी चरणबद्ध आंदोलन और धरने के लिए बाध्य होंगे।”
— स्थानीय श्रद्धालु एवं नागरिक मंच मझौली




