मध्य प्रदेश में बड़ा शिक्षा घोटाला: 51 फर्जी शिक्षकों पर FIR की तैयारी, लोकायुक्त ने 74 का रिकॉर्ड मांगा; 100 करोड़ से अधिक का वेतन डकार चुके हैं जालसाज

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सांवेर विकासखंड में वर्ष 2006-07 की संविदा शिक्षक भर्ती में हुए विशाल फर्जीवाड़े पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस गया है।

भोपाल/इंदौर

फर्जी D.Ed और B.Ed अंकसूचियों के दम पर पिछले दो दशकों से सरकारी नौकरी कर रहे 51 शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। वहीं, मामले की गहराई को देखते हुए लोकायुक्त पुलिस ने 74 संदिग्ध शिक्षकों की पूरी सेवा पुस्तिका और दस्तावेज तलब कर लिए हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान हुई इस भर्ती के जरिए इन जालसाजों को अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन बांटा जा चुका है।

फर्जीवाड़े का तरीका: एक रोल नंबर पर दो दावेदार, कई मार्कशीट बोर्ड में दर्ज ही नहीं

माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) द्वारा जब दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराया गया, तो जांच अधिकारियों के होश उड़ गए। जांच रिपोर्ट में सामने आए मुख्य तथ्य:

 * फर्जी अंकसूचियां: दर्जनों अंकसूचियां ऐसी पाई गईं, जिन्हें माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कभी जारी ही नहीं किया था।

 * रोल नंबर क्लोनिंग: कई मामलों में बोर्ड के एक ही रोल नंबर पर दो अलग-अलग अभ्यर्थियों के नाम से मार्कशीट जारी पाई गईं।

 * B.Ed की संदिग्ध डिग्रियां: D.Ed के अलावा लगभग 20 शिक्षकों के B.Ed प्रमाण पत्र भी पूरी तरह फर्जीवाड़े के घेरे में हैं।

अफसरों की सुस्ती पड़ी भारी: 2024 के आदेश पर अब तक दबा रहा मामला

हैरानी की बात यह है कि सितंबर 2024 में ही माध्यमिक शिक्षा मंडल की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संकुल प्राचार्यों को दोषी शिक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। हालांकि, प्रशासनिक ढिलाई और रसूखदारों के दबाव के कारण महीनों तक कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी रही।

अब लोकायुक्त की कड़ाई और स्पेशल टास्क फोर्स (STF, भोपाल) की समानांतर जांच के बाद शिक्षा विभाग की नींद टूटी है। विभाग ने 51 शिक्षकों के खिलाफ केस दर्ज कराने की कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचा दी है।

100 करोड़ से ज्यादा के वेतन की होगी रिकवरी, जाएगी नौकरी

वर्ष 2006-07 में नियुक्त ये संविदा शिक्षक नियमित होकर अब तक करीब दो दशकों से सरकारी खजाने से भारी-भरकम वेतन उठा रहे थे। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, इन फर्जी शिक्षकों को 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वेतन के रूप में दी जा चुकी है।

कानूनी विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, FIR दर्ज होते ही इन शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएंगी। इसके साथ ही, लोकायुक्त और STF फर्जीवाड़े से अर्जित किए गए पूरे वेतन की रिकवरी (वसूली) और जालसाजी की धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

सुंदरलाल बर्मनhttps://majholidarpan.com/
Sundar Lal barman (41 years) is the editor of MajholiDarpan.com. He has approximately 10 years of experience in the publishing and newspaper business and has been a part of the organization for the same number of years. He is responsible for our long-term vision and monitoring our Company’s performance and devising the overall business plans. Under his Dynamic leadership with a clear future vision, the company has progressed to become one of Hindi e-newspaper , with Jabalpur district.

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