बिल-वाउचर से लेकर मनरेगा तक 5 वर्षों के कारनामों की खुली कुंडली; CEO की अनुपस्थिति के चलते 5 अक्टूबर की सुनवाई टली, बंद कमरों में बनी ‘जांच रिपोर्ट’ पर भड़के शिकायतकर्ता
सिंगरौली (मझौली दर्पण ब्यूरो):
जनपद पंचायत देवसर की बहुचर्चित ग्राम पंचायत निगरी में विकास के नाम पर शासकीय धन की खुली लूट और नियमों की धज्जियां उड़ाने का मामला अब जिला प्रशासन की सीधी रडार पर आ चुका है। पंचायत निधि के सुनियोजित दुरुपयोग, फर्जी बिलिंग, कागजी निर्माण और मनरेगा में जमकर की गई बंदरबांट को लेकर जिला पंचायत सिंगरौली ने कड़ा प्रशासनिक शिकंजा कस दिया है। 43 सुबूतों और बिंदुओं पर दर्ज विस्तृत शिकायत का संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने निगरी सरपंच श्रीमती अंजनी बाई प्रजापति एवं तत्कालीन सचिव श्री सुखसेन साहू के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सीईओ जिला पंचायत द्वारा जारी पत्र क्रमांक 2868/शिका./जि.पं./2026 (दिनांक 01.10.2026) के जरिए दोनों जिम्मेदार पदधारियों को 5 अक्टूबर 2026 को शाम 4:00 बजे अपने बचाव में मूल अभिलेखों सहित उपस्थित होने का फरमान सुनाया गया था। हालांकि, नियत तिथि पर सीईओ की अपरिहार्य प्रशासनिक व्यस्तता व अनुपस्थिति के चलते औपचारिक सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। अब आगामी तिथि में इस महाघोटाले पर सुनवाई तय की जाएगी, जिससे पंचायत महकमे में जबरदस्त हड़कंप मचा हुआ है।
पिछले 5 वर्षों के कारनामों पर 43 बिंदुओं की ‘चार्जशीट’
ग्राम पंचायत निगरी में लंबे समय से चल रहे इस कथित भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए सजग शिकायतकर्ता प्रमोद कुमार साकेत एवं रवि प्रसाद साहू ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। उन्होंने पिछले 5 वर्षों के दौरान स्वीकृत व आहरित बजट की स्वतंत्र, जिला स्तरीय तकनीकी टीम से जांच की मांग उठाई है। शिकायत के प्रमुख बिंदुओं ने पंचायत के अंदरूनी घालमेल को बेनकाब कर दिया है:
* फर्जी जीएसटी व बोगस बिलिंग: सामग्री क्रय के नाम पर लाखों के बिल-वाउचर, GSTIN, GST Return और अनिवार्य E-Way Bill का भौतिक व कर पोर्टल पर सत्यापन।
* दस्तावेजों में हेराफेरी: स्टॉक रजिस्टर, तकनीकी मूल्यांकन की माप पुस्तिका (MB), बैंक स्टेटमेंट और ग्राम सभा के फर्जी प्रस्तावों की फोरेंसिक समीक्षा।
* धरातल से गायब निर्माण कार्य: नाली, आदर्श गौशाला, स्ट्रीट लाइट खरीदी, चेकडैम, सामुदायिक शौचालय, तालाब गहरीकरण और कागजी पौधरोपण का जमीनी भौतिक सत्यापन।
* मनरेगा में मजदूरी का खेल: जॉब कार्डधारकों को दरकिनार कर मस्टररोल में फर्जी नाम चढ़ाकर की गई अवैध निकासी का क्रॉस-वेरिफिकेशन।
* हितों का टकराव (Conflict of Interest): पद का दुरुपयोग कर सरपंच-सचिव द्वारा अपने चहेते परिजनों और व्यक्तिगत स्वार्थ से जुड़ी निजी फर्मों को पंचायत निधि से किए गए संदेहास्पद भुगतान।
जांच की निष्पक्षता तार-तार: शिकायतकर्ताओं की गैर-मौजूदगी में ‘क्लीन चिट’ की साजिश?
इस पूरे मामले में प्रशासनिक मिलीभगत और जांच की विश्वसनीयता पर भी तीखे सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत देवसर के सहायक यंत्री को पत्र क्रमांक 2176 (दिनांक 07.09.2026) के जरिए जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था। इस पर शिकायतकर्ताओं ने निष्पक्षता पर सीधा संशय जताते हुए पहले ही कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ से 5 सदस्यीय स्वतंत्र दल गठित करने की मांग रखी थी।
शिकायतकर्ताओं का सनसनीखेज आरोप है कि जब 5 अक्टूबर को जिला पंचायत में सुनवाई टल गई, उसी दौरान जनपद स्तर के जिम्मेदार तकनीकी अमले ने शिकायतकर्ताओं को पूरी तरह अंधेरे में रखकर, सरपंच और सचिव के साथ साठगांठ कर बंद कमरे में एकतरफा ‘जांच प्रतिवेदन’ तैयार कर डाला। आरोप है कि यह पूरी कवायद भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने और जिम्मेदारों को बचाने की सोची-समझी पटकथा है।
गबन साबित हुआ तो वसूली के साथ तय होगी जेल
जिला पंचायत प्रशासन के कड़े रुख से स्पष्ट है कि यदि निर्धारित 43 बिंदुओं पर एक-एक पाई और निर्माण कार्य का संतोषजनक, तकनीकी व तथ्यात्मक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की कठोर धाराओं के तहत पद से बर्खास्तगी, राशि की कुर्की वसूली और सीधे आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। निगरी पंचायत के इस बहुचर्चित मामले में अब सबकी निगाहें जिला पंचायत द्वारा तय होने वाली अगली तारीख और पेश किए जाने वाले मूल दस्तावेजों पर टिकी हैं।